
ITR Filing 2026 : आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग सीजन के बीच लाखों टैक्सपेयर्स ChatGPT, Gemini, Claude जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की मदद ले रहे हैं। कोई टैक्स कैलकुलेशन करवा रहा है तो कोई डिडक्शन और टैक्स बचत के विकल्प समझ रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि AI की सलाह पर आंख बंद करके ITR दाखिल करना महंगा पड़ सकता है, क्योंकि अब आयकर विभाग भी एडवांस AI और डेटा एनालिटिक्स की मदद से रिटर्न की जांच कर रहा है। आयकर विभाग के आधुनिक सिस्टम ITR में दी गई जानकारी को AIS, TIS, फॉर्म-16, बैंकिंग रिकॉर्ड, ब्रोकरेज डेटा और अन्य थर्ड-पार्टी स्रोतों से मिलान करते हैं। यदि किसी भी जानकारी में अंतर पाया जाता है, तो सिस्टम तुरंत उसे फ्लैग कर सकता है। ऐसे मामलों में रिफंड अटक सकता है और टैक्सपेयर्स को नोटिस भी भेजा जा सकता है।
इन गलतियों पर सबसे ज्यादा नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, फॉर्म-16 और ITR में आय के आंकड़ों में अंतर सबसे आम गलती है। इसके अलावा बैंक ब्याज, FD से हुई कमाई, डिविडेंड इनकम और अन्य स्रोतों से हुई आय को छिपाना भी जोखिम भरा साबित हो सकता है। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या संपत्ति की बिक्री से हुए कैपिटल गेन को गलत तरीके से दिखाने पर भी विभाग का AI सिस्टम अलर्ट जारी कर सकता है। वहीं HRA, 80C, 80D और अन्य सेक्शन के तहत गलत या बढ़ा-चढ़ाकर डिडक्शन क्लेम करना भी जांच के दायरे में आ सकता है।
विदेशी आय छिपाने पर तुरंत अलर्ट
विदेशी संपत्ति या विदेशी आय से जुड़ी जानकारी छिपाने वाले मामलों पर भी विभाग की विशेष नजर है। पहले जहां ऐसे मामलों की जांच में काफी समय लगता था, वहीं अब AI आधारित सिस्टम लाखों रिटर्न का तेजी से विश्लेषण कर रहा है। किसी भी संदिग्ध लेनदेन या जानकारी में अंतर मिलने पर रिफंड रोका जा सकता है या स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
AI मददगार है, लेकिन अंतिम सलाहकार नहीं
हाल के वर्षों में टैक्स प्लानिंग और ITR फाइलिंग में AI टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ये जटिल टैक्स नियमों को आसान भाषा में समझाने और शुरुआती कैलकुलेशन करने में मदद करते हैं। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि AI हमेशा सटीक नहीं होता। कई बार AI पुराने नियमों या अधूरी जानकारी के आधार पर जवाब दे सकता है। तकनीकी भाषा में इसे “हैलुसिनेशन” कहा जाता है। ऐसे में केवल AI की सलाह पर भरोसा कर रिटर्न दाखिल करना जोखिम भरा हो सकता है।
डेटा प्राइवेसी भी बड़ी चिंता
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि PAN, फॉर्म-16, बैंक स्टेटमेंट और अन्य संवेदनशील दस्तावेज किसी भी सार्वजनिक AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से बचना चाहिए। डेटा सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। टैक्स सलाहकारों का कहना है कि AI का उपयोग केवल जानकारी समझने और प्रारंभिक गणना तक सीमित रखना चाहिए। ITR दाखिल करने से पहले सभी आंकड़ों का मिलान आयकर विभाग के रिकॉर्ड से जरूर करें और जटिल मामलों में चार्टर्ड अकाउंटेंट की सलाह लें।
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