- जश्न ऐसा मानो जहांपनाह बाईज्जत रिहा हो गए हों,
- मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर कमीशन घोटाले में गए थे भीतर,
रंजन कुमार सिंह
रांची। मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर कमीशन घोटाले मामले में जेल में बंद झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद आज बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार से जमानत पर बाहर आने का मौका मिला। लेकिन इसे “बाइज्जत बरी” होना समझने की भूल कोई न करे। यह केवल उम्र और बीमारी के आधार पर कड़ी शर्तों के साथ मिली अंतरिम राहत है, अंतिम फैसला नहीं। हैरानी की बात यह है कि उनके समर्थक और लाभार्थी जमानत पर ऐसे जश्न मना रहे हैं मानो कोई क्रांतिकारी आज़ादी की लड़ाई लड़कर लौटा हो। मिठाइयाँ बाँटी जा रही हैं, पटाखे फोड़े जा रहे हैं, आतिशबाज़ी हो रही है। क्या करोड़ों रुपये की कथित काली कमाई, कमीशनखोरी और गरीबों के हिस्से पर डाका डालने के आरोप अब उत्सव मनाने लायक उपलब्धि बन चुके हैं?
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जिस मामले में मंत्री के निजी सचिव के घरेलू सहायक के घर से करीब ₹32.20 करोड़ नकद बरामद हुए हों, वहाँ जनता सवाल पूछेगी ही। आखिर एक घरेलू सहायक के घर में नोटों का पहाड़ कैसे खड़ा हो गया? नोट गिनने के लिए मशीनें मंगानी पड़ी थीं। पूरा देश टीवी पर वह दृश्य देख रहा था और झारखंड शर्म से सिर झुकाए खड़ा था। याद रखिए, जमानत मिल जाना निर्दोष होने का प्रमाण नहीं होता। मुकदमा अभी बाकी है, अदालतें अभी बाकी हैं और कानून की प्रक्रिया अभी लंबी चलेगी। सत्ता, संपर्क और संसाधनों के दम पर कुछ समय की राहत तो मिल सकती है, लेकिन ऐसे मामलों का दाग आसानी से नहीं मिटता। अगर भरोसा न हो तो लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक और कानूनी सफर को देख लीजिए। सत्ता गई, उम्र ढली, स्वास्थ्य बिगड़ा, लेकिन पुराने मामलों की परछाई आज भी पीछा नहीं छोड़ रही। भ्रष्टाचार के मामलों में अदालत की दस्तक देर से जरूर आती है, पर आती जरूर है।
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उल्लेखनीय है कि झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम का टेंडर कमीशन और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाला राज्य का एक बड़ा चर्चित मामला रहा है। मई 2024 में ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद वे करीब दो साल जेल में रहे और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहा हुए हैं। इस मामले में उनके निजी सचिव के ठिकानों से करोड़ों की नकद बरामदगी हुई थी। आरोप है कि ग्रामीण विकास विभाग में सरकारी टेंडर दिलाने के बदले ठेकेदारों से कमीशन (रिश्वत) वसूला जाता था। यह कमीशन ऊपर से नीचे तक बांटा जाता था, जिसमें आलमगीर आलम का नाम मुख्य रूप से आया। ED की रेड और भारी कैश: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मई 2024 में आलमगीर आलम के निजी सचिव (PS) संजीव कुमार लाल और उनके नौकर जहांगीर आलम के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान 32 करोड़ रुपये से अधिक की नकद राशि मिली, जिसे गिनने के लिए मशीनें बुलानी पड़ी थीं।
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गिरफ्तारी और इस्तीफा
इस भारी भरकम रिकवरी के बाद ईडी ने 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
जमानत का सफर
झारखंड हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी, जिसके बाद वे कल जेल से बाहर आए हैं।
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