- आगाज से अंजाम तक
- 24 घण्टे चला मानसिक विक्षिप्त गुरप्रीत सिंह का खेल
- 3 बेगुनाहों की जान लेकर दुनिया छोड़ गया गुरूपीत सिंह
चंदौली/वाराणसी। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में बीते 24 घंटे ने एक खौफनाक सिलसिले को जन्म दिया, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। पूर्व सैनिक गुरप्रीत सिंह, जिसे पुलिस ने ‘साइको किलर’ करार दिया, ने रविवार सुबह से सोमवार सुबह तक तीन बेगुनाहों की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। अंत में खुद भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। यह घटनाक्रम न सिर्फ हिंसा की पराकाष्ठा था, बल्कि मानसिक विक्षिप्तता और असलहे की अंधेरी शक्ति का जीता-जागता सबूत भी।सब कुछ शुरू हुआ रविवार सुबह करीब 6:45 बजे। डीडीयू-ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में गुरप्रीत सिंह चढ़ा। बिना किसी उकसावे के उसने गाजीपुर निवासी 34 वर्षीय मंगरू को सिर में गोली मार दी। यात्री चीखें मारकर इधर-उधर भागे, लेकिन हत्यारा शांतिपूर्वक अगली ट्रेन पकड़ने में सफल रहा। रात 1:30 बजे जम्मूतवी एक्सप्रेस में उसने बिहार के गया निवासी दिनेश साहू पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। एक बार फिर सिर निशाना था। दो हत्याएं, दो अलग ट्रेनें, महज कुछ घंटों के अंतराल में।सोमवार सुबह साढ़े छह बजे गुरप्रीत सिंह अलीनगर थाना क्षेत्र के कमलापुर स्थित जीवक अस्पताल पहुंचा। यहां भर्ती 55 वर्षीय बिहार की रहने वाली लक्ष्मीना बिस्तर पर लेटी थीं। आरोपी उपचार का बहाना बनाकर वार्ड में घुसा और महिला को भी सिर में गोली मार दी। इस बार वह भाग नहीं सका। अस्पताल के आसपास के ग्रामीणों ने उसे घेर लिया, जमकर पीटा और पुलिस के हवाले कर दिया पूछताछ में गुरप्रीत सिंह ने तीनों हत्याओं की जिम्मेदारी स्वीकार की। अमृतसर (पंजाब) का निवासी, 2021 में सेना की नौकरी छोड़ने वाला यह शख्स बिहार के आरा में गार्ड की ड्यूटी कर रहा था। उसके पास से एक लाइसेंसी रिवाल्वर और एक अवैध पिस्टल बरामद हुईं। पुलिस के अनुसार वह शराबी था और मानसिक संतुलन बिगड़ा हुआ था। तीन राज्यों पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश का कनेक्शन सामने आया।लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। सोमवार देर रात क्राइम सीन रीक्रिएट कराते समय गुरप्रीत सिंह ने पुलिसकर्मियों की पिस्तौल छीनने की कोशिश की और फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह गोली लगने से ढेर हो गया। दो पुलिसकर्मी इस दौरान घायल हुए।
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यह घटना कई सवाल खड़े करती है। मानसिक विक्षिप्त पूर्व सैनिक के पास लाइसेंसी हथियार कैसे था ? मानसिक स्वास्थ्य की जांच में कहां चूक हुई ? ट्रेनों में सुरक्षा इंतजाम कितने लचर हैं ? RPF और GRP की गश्ती टीमें ट्रेन में घटना के समय कहाँ थी ? चंदौली पुलिस, RPF और GRP की संयुक्त टीम अब पूरे मामले की गहन छानबीन कर रही है। स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। अस्पताल परिसर और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। तीन निर्दोष परिवारों की जिंदगी एक पागलपन भरे 24 घंटे में उजड़ गई। गुरप्रीत सिंह का खेल खत्म हो गया, लेकिन उसकी छोड़ी गई दहशत और सवाल लंबे समय तक गूंजते रहेंगे।
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One thought on “चंदौली के साइको किलर की कहानी”
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