अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है, वहीं कई देशों में ईंधन, खाद और जरूरी सामानों की सप्लाई पर संकट गहराता जा रहा है। वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने से आयात-निर्यात व्यवस्था भी चरमरा गई है। इसी बीच चीन को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने दुनिया की चिंता और बढ़ा दी है। दरअसल, जानकारी सामने आई है कि चीन चुपचाप बड़े पैमाने पर अनाज, खाद और खाद्य सामग्री का भंडारण कर रहा है। इसे लेकर विश्व बैंक के पूर्व अध्यक्ष डेविड मालपास ने गंभीर चेतावनी दी है। BBC से बातचीत में मालपास ने आरोप लगाया कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा अनाज और खाद भंडार तैयार कर रहा है और उसे लगातार बढ़ा भी रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति संकट को कम करने के लिए चीन को तत्काल जमाखोरी बंद करनी चाहिए।
दुनिया का सबसे बड़ा खाद और अनाज भंडार बना रहा चीन
डेविड मालपास के अनुसार, चीन के पास इस समय दुनिया का सबसे बड़ा अनाज और उर्वरक भंडार मौजूद है। चीन ने घरेलू जरूरतों का हवाला देते हुए मार्च की शुरुआत से ही खाद के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इस फैसले से भारत समेत कई कृषि आधारित देशों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भारत पहले ही महंगे दामों पर खाद आयात करने को मजबूर है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध से पहले भारत जहां यूरिया 512 डॉलर प्रति टन की दर से खरीद रहा था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 959 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। यानी भारत को लगभग दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है।
आखिर चीन क्यों कर रहा है जमाखोरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम केवल सुरक्षा के लिहाज से नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चाल भी हो सकती है। ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक व्यापार पर गंभीर असर पड़ा है। चीन को आशंका है कि अगर लंबे समय तक सप्लाई बाधित रही तो उसके यहां खाद्य संकट पैदा हो सकता है। इसके अलावा, माना जा रहा है कि अनाज और खाद का विशाल भंडार तैयार कर चीन वैश्विक राजनीति में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है। जब दुनिया में खाद और अनाज की कमी होगी और कीमतें आसमान छूएंगी, तब चीन अपने भंडार का इस्तेमाल आर्थिक और रणनीतिक लाभ के लिए कर सकता है।
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भारत के लिए क्यों बजी खतरे की घंटी?
भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर आधारित है। देश अपनी खाद जरूरतों, खासकर डीएपी और यूरिया के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में चीन द्वारा खाद निर्यात रोकना भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अगर खाद की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो किसानों की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर खेती और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ेगा। यानी आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। भारत पहले ही महंगे कच्चे तेल की मार झेल रहा है, ऊपर से चीन की जमाखोरी देश पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकती है।
वैश्विक संकट के बीच भारत के सामने बड़ी चुनौती
विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत को खाद और खाद्य सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक रणनीति बनाने की जरूरत है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने, वैकल्पिक आयात स्रोत खोजने और किसानों को राहत देने के लिए सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे, वरना आने वाले समय में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
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