सरकार ने महंगाई से जूझ रही जनता को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर टैक्स घटकर ₹3 प्रति लीटर रह गया है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। यह निर्णय वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हाल ही में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आई रुकावट ने सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।
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भारत, जो अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इस स्थिति से सीधे प्रभावित होता है। ऐसे में सरकार का यह कदम महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार ने जनता के हित को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे देश में भी दबाव बन रहा था। इसके बावजूद सरकार ने कीमतों को सीधे बढ़ाने के बजाय टैक्स कम करके राहत देने का विकल्प चुना।
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इस फैसले का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। पेट्रोल और डीजल सस्ते होने से परिवहन लागत कम होगी, जिसका फायदा अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी दिख सकता है। हालांकि, एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार के राजस्व पर असर पड़ता है। लेकिन सरकार का मानना है कि यह कदम आर्थिक स्थिरता और उपभोक्ता हितों के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं, तो इस कटौती का फायदा लंबे समय तक मिल सकता है। लेकिन अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो आगे और कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है।
