- 14 दिन में कई बिंदुओं पर काम करने के बाद नतीजा सिफर
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। बाराबंकी जिले के तमाम अधिवक्ताओं के अल्टीमेटम के बाद खुलासे के लिए लगाई गई पुलिस की टीमों ने बीते 14 दिनों में पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन नतीजा कुछ न निकल सका। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। बाराबंकी पुलिस कितना हाईटेक है? कातिलों की तलाश में जुटी पुलिस जेल में बंद सूचीबद्ध अपराधियों से लेकर छुटभैय्ए बदमाशों की कुंडली तक खंगालने का दावा किया, लेकिन अधिवक्ता शोएब किदवई उर्फ बॉबी के कातिलों की हवा तक नहीं लग सकी। जब भी इस बाबत किसी जिम्मेदार अफसर से सवाल किया गया तो बस उनका एक ही रटा-रटाया जवाब मिला पुलिस की टीमें सरगर्मी से हत्यारों की खोज में जुटी हुई है और उम्मीद है कि बहुत जल्द ही हत्यारे सलाखों के पीछे होंगे।
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बीते दिनों की तरह एक बार फिर कचहरी को मिली बम से उड़ाने की धमकी
13 फरवरी 2026 को बाराबंकी जिले के सफेदाबाद क्षेत्र स्थित असैनी मोड़ के पास मुख्तार अंसारी के करीबी रहे अधिवक्ता शोएब किदवई उर्फ बॉबी हत्याकांड के बाद सबसे पहले पुलिस ने आसपास में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ बाराबंकी जिले के अधिकांश गलियारों को चेक करने के साथ इलाकाई बदमाशों को संदेह के घेरे में रखकर उनसे पूछताछ शुरू की। जानकार बताते हैं कि कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर सफलता न मिलने पर पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाशों की कुंडली खंगालने के अतिरिक्त कुछ कुख्यात सूचीबद्ध बदमाशों के गुर्गों से पूछताछ की गई, लेकिन सब बेअसर साबित होकर रह गया। बताया जा रहा है कि इस मामले में पुलिस शुरू से ही मोबाइल फोन टॉवर के आसपास सक्रिय नंबरों की भी जोर-शोर से पड़ताल की। हालांकि यूपी पुलिस के लिए यह कोई पहली नाकामी नहीं है, गौर करें तो इससे पहले राजधानी लखनऊ में एक दिसंबर 2017 में बागपत जेल में मारे गए माफिया मुन्ना बजरंगी के करीबी मोहम्मद तारिक और पांच मार्च 2016 में मुन्ना बजरंगी के साले पुष्प जीत सिंह हत्याकांड की गुत्थी भी अभी तक पुलिस की फाइलों में गोते लगा रही है। आजतक हत्यारे पुलिस के हाथ नहीं लग सके।
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खरी नहीं उतरी पुलिस
अपराधियों को सबक सिखाने के लिए बाराबंकी पुलिस को मॉर्डन समेत कई सौगातें देकर हाईटेक तो बना दिया गया, लेकिन मुख्यमंत्री और डीजीपी राजीव कृष्ण के तमाम कोशिशों के बावजूद दर्जन भर से अधिक पुलिसकर्मी बदमाशों का सुराग लगाने में नाकाम रही। बीते 13 फरवरी 2026 को सफेदाबाद क्षेत्र स्थित असैनी मोड़ पर मुख्तार के करीबी रहे हिस्ट्रीशीटर शोएब किदवई उर्फ बॉबी का नाम उस समय सुर्खियों में आया था जब जेलर रमाकांत तिवारी की चार फरवरी 1999 को राजभवन के पास बदमाशों ने उन पर गोलियों की बौछार कर मौत की नींद सुला दिया था। उस समय पहली बार शोएब का नाम सामने आया था। इस मामले में जांच पड़ताल में जुटे एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि बदमाशों की तलाश में पुलिस की टीमें अलग-अलग दिशाओं में पड़ताल कर रही हैं और उम्मीद है कि जल्द ही पकड़ लिए जाएंगे।
