शनि प्रदोष व्रत आज: जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त व पूजा विधि और विशेष महत्व

राजेन्द्र गुप्ता

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। फरवरी 2026 के पहले प्रदोष व्रत को लेकर लोगों में तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, क्योंकि इस बार त्रयोदशी तिथि दो दिनों तक पड़ रही है।

प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा?

फरवरी 2026 में त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी शाम 04:01 बजे से प्रारंभ होकर 15 फरवरी शाम 05:04 बजे तक रहेगी। चूंकि 14 फरवरी की संध्या बेला यानी प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026, शनिवार को रखा जाएगा। शनिवार के दिन पड़ने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है।

 क्यों खास है शनि प्रदोष व्रत?

जब प्रदोष व्रत शनिवार को आता है, तब इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यह दिन भगवान शिव के साथ शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार

  • जीवन की बाधाएं और कष्ट कम होते हैं,
  • कर्म संबंधी परेशानियों से राहत मिलती है,
  • शनि दोष, कालसर्प दोष और पितृ दोष के शमन में सहायक माना जाता है।

करियर में रुकावट, आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है।

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प्रदोष व्रत का शुभ पूजा मुहूर्त

14 फरवरी 2026 को प्रदोष काल में पूजा करना अत्यंत शुभ रहेगा।

  • प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 06:10 बजे से रात 08:44 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:08 बजे से 06:34 बजे तक

इस समय शिवलिंग का अभिषेक और मंत्र जाप करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
हालांकि निशिता मुहूर्त 15 फरवरी की रात्रि में रहेगा, लेकिन मुख्य पूजा 14 फरवरी की संध्या में ही की जाएगी।

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 प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर यथाशक्ति उपवास रखें।
  • संध्या समय पुनः स्नान कर पूजा स्थल को शुद्ध करें।
  • भगवान शिव का जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, अक्षत, धूप, दीप और सफेद पुष्प अर्पित करें।
  • ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और प्रदोष व्रत कथा सुनें।
  • आरती के बाद नैवेद्य अर्पित करें।
  • श्रद्धा अनुसार फलाहार या एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • व्रत का पारण 15 फरवरी को किया जाएगा।

 व्रत के दिन क्या न करें

  • तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा) का सेवन न करें।
  • व्रत के दौरान अन्न ग्रहण से बचें।
  • क्रोध, झूठ और वाद-विवाद से दूर रहें।
  • साधारण नमक की जगह केवल सेंधा नमक का प्रयोग करें।
  • दिन में सोने से परहेज करें, इससे व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता।

 

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