मौनी अमावस्या व त्रिवेणी अमावस आज पर विशेष : इन चीजों का करें दान

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राजेन्द्र गुप्ता

सनातन धर्म में प्रत्येक तिथि का अपना आध्यात्मिक महत्व है, परंतु अमावस्या को विशेष रूप से स्नान, दान, तर्पण और पितृ शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इन्हीं अमावस्या तिथियों में मौनी अमावस्या को अन्य अमावस्या तिथियों की तरह ही पुण्यदायी अमावस्या कहा गया है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाने वाली यह तिथि आत्मशुद्धि, मौन साधना और पितरों के कल्याण का अनुपम अवसर प्रदान करती है।  मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन मौन रहकर किए गए जप-तप और सेवा कार्य साधक को विशेष पुण्य प्रदान करते हैं। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस दिन किया गया स्नान और दान मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।

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मौनी अमावस्या 2026 कब है?

वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि का शुभारंभ 18 जनवरी की रात 12 बजकर 03 मिनट से होगा और इसका समापन 19 जनवरी की रात 1 बजकर 21 मिनट पर होगा। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, यह पर्व 18 जनवरी को मनाया जाएगा।

स्नान का महत्व

मौनी अमावस्या के दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, सरयू अथवा किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा है। स्नान के समय पितरों का स्मरण करते हुए उन्हें जल अर्पित करें। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं, परिवार को आशीर्वाद देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। मान्यता है कि इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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गंगा स्नान संभव न हो तो क्या करें?

मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करके करोड़ों श्रद्धालु पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। किंतु यदि किसी कारणवश आप गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने में असमर्थ हैं, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। घर पर स्नान के जल में कुछ बूंदें गंगाजल मिलाकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। इसे भी गंगा स्नान के समान पुण्यकारी माना गया है। इसके अतिरिक्त, संध्या समय घर की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाएं। यह उपाय पितरों की कृपा प्राप्त करने और घर में शांति एवं खुशहाली लाने में सहायक माना जाता है।

मौनी अमावस्या पर दान

स्नान के पश्चात मौनी अमावस्या पर दान करना बेहद पुण्यदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया दान सौ यज्ञों के बराबर पुण्य फल देता है। दान का उल्लेख करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है-

प्रगट चारि पद धर्म के कलि महुँ एक प्रधान।

जेन केन बिधि दीन्हें दान करइ कल्यान॥

अर्थात् धर्म के चार चरण सत्य, दया, तप और दान हैं जिनमें कलियुग में एक दान रूपी चरण ही प्रधान है। दान जैसे भी दिया जाये वह कल्याण ही करता है। मौनी अमावस्या के दिन अन्न, वस्त्र, कंबल तथा जरूरतमंदों की आवश्यक वस्तुओं का दान करना चाहिए। साथ ही गौसेवा, पशु-पक्षियों को चारा और दाना डालना भी विशेष पुण्य प्रदान करता है। ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।

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मौनी अमावस्या पर इन चीजों का करें दान

मौनी अमावस्या पर अन्न के दान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दिन दान देकर नारायण सेवा संस्थान में दीन-दु:खी, निर्धन लोगों को भोजन कराने के प्रकल्प में सहयोग करके पुण्य के भागी बनें।

मौनी अमावस्या आत्मचिंतन और सेवा का पर्व है। मौन, स्नान, दान और पितृ स्मरण के माध्यम से यह दिन जातकों को जीवन को शुद्ध करने और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देता है।

मौनी अमावस्या पर श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ किए गए पुण्य कर्म न केवल पितरों को मोक्ष प्रदान करते हैं, बल्कि साधक के जीवन में भी शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक प्रकाश का संचार करते हैं।

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