बालगीत : ठंढी आई ठंढी आई

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बंदर,भालू,कुत्ता बिल्ली,

सबको तो ठंडी है लगती।
गाय भैस हाथी बकरी को,
इनको भी तो ठंडी लगती।।

पर इनकी मां ख्याल न करती।

बिना किसी कपड़े के देखो।

बाहर जाने को है कहती।।

पर हमको स्वेटर पहना कर।

मां बाहर जाने को कहती।

सुबह सांझ को ठंड बढ़ी है।

दोपहरी में धूप सजी है।।

दिन मे नहीं खेल मिलता है।

क्लास रूम में ही रहनी है।।

काश सरकता सरकउए पर।
झूला पर कुछ पेंग मारता।।
धूप बहुत मीठी लगती है।

काफी बिस्कुट चाकलेट तो।
हमको बहुत भली लगती है।।

ठंढी आई ठंढीआई।।

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