
झाड़ियों में खुद को आग लगाने वाले बंदी की मौत का मामला
Death of an inmate in Pratapgarh Jail: प्रतापगढ़ जेल में झाड़ियों में खुद को आग लगाकर जान देने वाले मामले की मजिस्ट्रियल जांच के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस घटना को हुए करीब पांच माह हो चुके है लेकिन अधीक्षक और जेलर आज भी उसी जेल पर बरकरार हैं। जबकि घटना की मजिस्ट्रियल जांच हुए करीब ढाई माह का समय बीत चुका है। बताया जा रहा है कि कारागार विभाग के इतिहास में यह पहली घटना है जिसने बंदी ने खुद अपनी चिता तैयार कर अपनी जान दे दी हो। मिली जानकारी के मुताबिक बीती 10 अप्रैल को प्रतापगढ़ जेल में गौशाला बनाने का काम चल रहा था। इसके लिए पेड़ो की टहनियों को काटकर एक जगह एकत्र किया गया था।
गुरुवार को जेल में बंद उन्नाव के पुरवा मिर्जापुर थाना रसूलाबाद निवासी दीपक उर्फ राहुल पुत्र शांति प्रसाद ने झाड़ी में घुसकर खुद आग लगाकर अपनी जीवनलीला को समाप्त कर लिया था। जेल प्रशासन के अधिकारियों की यह कहानी किसी को हजम नहीं हो रही है। आत्महत्या के लिए एकत्र की गई झाड़ियों में खुद को आग लगाकर खत्म कर लेने की घटना ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। आत्महत्या के लिए चिता बनाकर जान देने के बजाए दूसरे तरीके से भी इस घटना को अंजाम दिया जा सकता था। यह सवाल विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि जेल के अंदर आग लगने की जानकारी तो जेल अधिकारियों को हुई लेकिन बंदी की होने मौत की घंटों तक उन्हें भनक तक नहीं लगी।
जेल में हुई सनसनीखेज घटना के पांच माह बाद भी अधीक्षक जेलर बरकरार
सूत्रों का कहना है कि जेल में निरुद्ध सजायाफ्ता कैदी की मौत के मामले की प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए। जांच के लिए संयुक्त मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी सदर अनुष्का शर्मा को नामित किया गया । जांच अधिकारी ने आमजन संबंधित पक्षों तथा संस्थाओं से मामले से जुड़े साक्ष्य, दस्तावेज तथा बयान उपलब्ध कराने की अपील की है।
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उन्होंने कहा है कि जिसके पास इस प्रकरण से संबंधित कोई जानकारी हो वह आगामी 10 दिनों के भीतर तहसील सदर स्थित कार्यालय में उपस्थित होकर अपना लिखित या मौखिक पक्ष प्रस्तुत कर सकता है। सूत्रों का कहना जून माह में मजिस्ट्रियल जांच पूरी हो जाने के बाद भी अभी तक अधीक्षक और जेलर खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है। चर्चा है कि इस विभाग में ऊंची पहुंच और जुगाड रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही होती ही नहीं है।
प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर भी नहीं हुई कार्रवाई
कारागार विभाग के इतिहास में पहली बार दिल दहला देने वाली घटना की जेल प्रशासन के अधिकारियों को भनक तक नहीं लग पाई। बताया गया है कि शाम के वक्त जेल बंद होने के समय होने वाली गिनती में जब एक बंदी कम मिला तो जेल में हड़कंप मच गया। जब इसकी खोजबीन की गई तो सुखी जली लकड़ियों के बीच बंदी का जला हुआ शव मिला। शव इतनी बुरी तरह से जल चुका था कि वह पहचान में नहीं आ रहा था।
गिनती के बाद उसकी पहचान दीपक उर्फ राहुल के रूप में हुई। उधर इस संबंध में जब घटना के बाद तत्काल जांच करने गए डीआईजी कानपुर परिक्षेत्र प्रदीप गुप्ता से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि इसमें प्रथम दृष्ट्या जेल प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। इसके करीब पांच माह बाद भी विभाग के आला अफसरों ने न तो अधीक्षक और न ही जेलर के खिलाफ कोई प्रभावी कार्यवाही की गई है।
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