
बदलना होगा कैश रखने वाला कैसेट
Polymer note: अगर सब कुछ ठीक चलता रहा तो नए साल में लोग प्लास्टिक या पॉलिमर नोट का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक एक्शन मोड में आ चुका है। हालांकि इसे लागू करने लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। एक बड़े सरकारी बैंक के सीनियर अधिकारी ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पॉलिमर नोट लाने के प्लान में काफी खर्च आएगा, क्योंकि ATM में कैश रखने वाली कैसेट को बदलना होगा। बैंकर ने कहा कि कैसेट बदले बिना मौजूदा ऑटोमेटेड टेलर मशीनों में पॉलिमर नोट नहीं डाले जा सकते। इसका मतलब बैंकों के लिए अतिरिक्त खर्च होगा। हालांकि, बैंकों ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि इस पर कितना खर्च आएगा।
कितना खर्च करना होगा?
अपना नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले बैंकर ने कहा कि ATM बदलने का खर्च लगभग 2 लाख है। वहीं, कैसेट बदलने के खर्च की बात करें तो इससे कम होगा। बैंकर ने कहा, “जहां तक हमें पता है, भारत में ऐसी कोई कंपनी नहीं है जो ये कैसेट बनाती हो, इसलिए इन्हें कहां से मंगाया जाए, इस पर चर्चा करनी होगी।” बैंकर के मुताबिक लंबे समय में पॉलिमर नोटों को शुरुआती दौर में अपनाने में बहुत खर्च आता है। जब पहले नोटों का साइज बदला गया था, तो बैंकों को एटीएम में कैसेट बदलने में लगभग एक साल लग गया था ताकि वे नए नोट निकाल सकें।” कैसेट वे बॉक्स होते हैं जिनमें एटीएम में अलग-अलग मूल्य के नोट रखे जाते हैं। हर एटीएम में हर मूल्य के नोट के लिए अलग-अलग कैसेट होती हैं।
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RBI गवर्नर ने कहा था
सब कुछ योजना के अनुसार चलता रहा तो अगले वित्त वर्ष के आरंभ तक प्लास्टिक के नोट लोगों के हाथों में होंगे। बीते दिनों आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि शुरुआत में इन नोटों को पायलट परीक्षण के लिए लाया जाएगा। यदि पायलट में सबकुछ ठीक रहा तो इसका आगे विस्तार किया जाएगा। संजय मल्होत्रा ने कहा, “यदि सबकुछ योजना के मुताबिक हुआ तो हमने अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में इसे लाने का लक्ष्य रखा है।” उन्होंने बताया कि अभी पॉलिमर के कागज के लिए निविदा आमंत्रित की है। उसके आने के बाद उस पर परीक्षण किए जाएंगे, सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियां मिलेंगी, कई चरण हैं, कई सिक्योरिटी फीचर हैं। उन्होंने कहा कि सही समय पर लोगों को इसकी जानकारी दी जाएगी।
पॉलिमर के नोट लाने के दो मकसद हैं। पहला, इससे नोट का जीवनकाल बढ़ जाता है। यह विशेष रूप से कम मूल्य के नोटों पर अधिक लागू होता है जिनका हस्तांतरण एक हाथ से दूसरे हाथ में अधिक होता है जिससे वे जल्दी खराब हो जाते हैं। कई देशों में 30 साल से इन नोटों का इस्तेमाल हो रहा है। वहां यह पाया गया है कि ये नोट कागज के नोटों की तुलना में तीन-चार गुना ज्यादा समय तक चलते हैं। इसके अलावा, इससे आरबीआई की क्षमता बढ़ जाती है। अर्थव्यवस्था के बढ़ते आकार के साथ क्षमता बढ़ाना जरूरी है।
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