चर्चा है कि तावड़े से भी ज्यादा खतरनाक संतोष का सोंटा है!
Lucknow : विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा नेतृत्व लगातार सक्रिय हो रहा है। सरकार और संगठन में बैठे जिम्मेदार इसकी तहकीकात कर रहे हैं कि पिछले दिनों अभियानों और प्रवास कार्यक्रम में किसने-किसने पूरा योगदान देने में आनाकानी की है। जिनके योगदान में कमी हुई होगी उन्हें हटाया जा सकता है। दो दिवसीय प्रवास पर आये प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े साफ-साफ कह दिया है कि मार्च तक किसी को कोई छुट्टी नहीं मिलेगी। जिनके घर में शादी-विवाह पड़ेगा उस पदाधिकारी को पार्टी के कार्यक्रमों और अभियानों में छुट्टी नहीं दी जायेगी। उन्होंने चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले पदाधिकारियों के संदर्भ में जानना चाहा तो सभी पदाधिकारियों की घिघ्घी बंध गयी। सबने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की टीम में विधायक राजेश चौधरी महामंत्री बनाये गये हैं।
वह मथुरा की मांट विधानसभा सीट से विधायक हैं। पूर्व मंत्री सुरेश राणा प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, वह शामली जिले की थाना भवन सीट से दो बार विधायक रहे हैं। यह सीट अब रालोद के कब्जे में है। 2022 में सपा-रालोद गठजोड़ के प्रत्याशी अशरफ अली यहां से विधायक हैं।चर्चा है कि मथुरा की मांट सीट पर भी रालोद ने दावा ठोंका है। सपा से आयी विधायक पूजा पाल को भी प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है।वह प्रयागराज की इलाहाबाद पश्चिमी सीट से विधायक हैं। बताया जाता है कि पंकज चौधरी की टीम में कुछ और पदाधिकारी हैं जो चुनाव लड़ने का दम रखते हैं। लेकिन तावड़े के कड़े रुख के चलते वह अभी चुप हैं समय आने पर वह भी अपना पत्ता खोलेंगे।
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प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह इस बात को लेकर ऐकमत्य हैं कि जो पदाधिकारी चुनावी तैयारी में ढिलाई बरतेगा उसे बेझिझक दैत्यव मुक्त कर उसके स्थान पर संगठन के अनुभवी व जिम्मेदार कार्यकर्ता को मनोनयन कर दिया जाय। पार्टी नेतृत्व किसी भी कीमत पर अपने गति में बाधा डालने वालों को ढोने के पक्ष में नहीं है। जो पदाधिकारी किसी भी विधानसभा क्षेत्र में क्षेत्र के साथ अपना होडिंग्स लगाये पाये जायेंगे उनको तुरंत तलब कर उसकी सत्यता जांच कर आगे की कार्यवाही की जायेगी। बता दें कि अवध, काशी, पश्चिम क्षेत्र से पदाधिकारी बने कुछ नेता इस लिये चुनाव की तैयारी का हल्ला मचा रहे थे कि आने वाले दिनों में विधानपरिषद में उनकी दावेदारी मजबूत रहे।
कुछ पदाधिकारी 2017 और 2022 में हारी हुई सीटों पर लड़ने के लिये ताल ठोंक रहे हैं। प्रदेश महामंत्री धर्मपाल सिंह स्वयं जमीन पर काम करने में विश्वास रखते हैं। वह उन सीटों पर विशेष जोर दे रहे हैं जिसे 2022 में भाजपा बहुत कम अंतर से हारी थी। पार्टी के आंतरिक सर्वे में वर्तमान विधायकों में ऐसे सदस्यों की बड़ी संख्या है पार्टी नेतृत्व से जिनके टिकट बदलने की सिफारिश की गयी है। तावड़े के कम्प्यूटर में उनके नाम या चुके हैं। अगले 10-11 सितंबर को यूपी प्रवास पर आ रहे राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष यूपी भाजपा का अपडेट आंकड़ा लेकर आयेंगे।
2017 में भाजपा ने 312 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में 255 सीटें ही मिलीं।सूत्रों के अनुसार बीएल संतोष यह जानना चाहते हैं कि दस वर्ष की सरकार चलाने के बाद भी हम यह दावा क्यों नहीं कर पा रहे हैं कि जिन 57 सीटों पर हमें पराजय मिलती आ रही है उसे हम या हमारे सहयोगी दल को आगे करके कैसे जीत सकते हैं। उन सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिये दूसरे दलों के जिताऊँ लोगों को लाना है तो लाना चाहिये। हालांकि पार्टी 5 हजार से कम अंतर से जीतने वाली अपनी सीटों के अलावा विपक्ष के 130 सीटों पर अनुकूल स्थित वाली सीटों का चयन कर कैसे जीत सकते हैं, उनके पास इसकी भी तैयारी है।दिल्ली में सक्रिय रहने वाले पहली बार पंकज चौधरी की टीम में पहले से ज्यादा संख्या में आ गये हैं जो खुद को जोड़-तोड़ का महारथी मानते हैं। वह दिल्ली से प्रवास पर आने वाले नेताओं को बहुत तोप नहीं मानते हैं।
लखनऊ के राजनैतिक गलियारों में अभी तक यही संदेश गया है। उन्हें क्षेत्र प्रचारक अनिल जी और प्रदेश महामंत्री धर्मपाल सिंह को फेस करने में अभी तक वह अनुकूलता नहीं मिल पायी, जितना समझ कर वह लखनऊ के अन्य नेताओं को डील करते थे। सारे हवाई हवा में ही उड़ रहे रहें उन्हें सुरक्षित लैंडिंग की असुविधा से जूझना पड़ रहा है।बीएल संतोष के आने से पहले मीडिया, युवा, महिला, किसान, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी मोर्चे की प्रदेश टीमों का गठन और प्रकोष्ठ के संयोजकों की घोषणा करना भी चुनौती बन गया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के क्षेत्रीय अध्यक्षों ने जो टीम दिया है उनमें उनसे ज्यादा पंकज चौधरी और उनके लोगों की मर्जी चली है, जिसके कारण किसी-किसी जिले में कई-कई पदाधिकारी बन गये तो कई जिले पदाधिकारी के लिये तरस गये। यह प्रदेश और क्षेत्र दोनों टीमों में देखने को मिला है। प्रदेश की टीम में गोरखपुर, बाराबंकी, गाजीपुर और लखनऊ की तरह क्षेत्र में भी उन्हीं जिलों का वर्चस्व देखने को मिला। खास कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का जिला इस रोग से अधिक ग्रस्त हुआ। दूसरे जिलों में सिद्धांत ठोंकने वाले अपने जिले में इतना बेबस हो गये कि कई जिलों का प्रतिनिधित्व छीन कर अपने जिले में रख लिया। इस पर केंद को शिकायत की गई है।बता दें कि बीएल संतोष के सोंटे (अनुशासन) की हनक पदाधिकारियों के सिर चढ़ कर बोल रहा है। उनकी चपेट में कोई पड़ना नहीं चाह रहा है।
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One thought on “ताव में तावड़े, बिना नेतृत्व को बताये चुनाव लड़ने की होडिंग्स लगी मिली तो पदाधिकारियों की होगी छुट्टी!”
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