Prayagraj: बरेली हिंसा मामले में जेल में बंद मौलाना तौकीर रजा खान को इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस तरह के नारे की तुलना ‘जय श्री राम’, ‘अल्लाहू अकबर’ या अन्य धार्मिक उद्घोषों से नहीं की जा सकती।
जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की अदालत ने कहा कि ‘सर तन से जुदा’ जैसा नारा कानून के शासन, देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए चुनौती पैदा करने वाला है। अदालत ने यह भी माना कि धार्मिक या राजनीतिक हितों के लिए भीड़ जुटाकर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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जमानत देने से अदालत ने किया इनकार
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ 21 दिसंबर 2025 को आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, हालांकि अभी आरोप तय नहीं हुए हैं। मामले से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा करना उचित नहीं माना और याचिका खारिज कर दी।
‘आई लव मोहम्मद’ अभियान के दौरान जुटी थी भीड़
मामला सितंबर 2025 में बरेली में हुई हिंसा से जुड़ा है। आरोप है कि 26 सितंबर को जुमे की नमाज के बाद मौलाना तौकीर रजा ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से इस्लामिया इंटर कॉलेज परिसर में एकत्र होने की अपील की थी। यह आह्वान ‘आई लव मोहम्मद’ अभियान के समर्थन में प्रस्तावित रैली की अनुमति नहीं मिलने के विरोध में किया गया था। उस समय प्रशासन की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और बाद में भीड़ ने मार्च निकालने की कोशिश की।
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पुलिस पर पथराव और तेजाब की बोतलें फेंकने का आरोप
अदालत के समक्ष रखे गए रिकॉर्ड के मुताबिक, भीड़ और पुलिस के बीच तनाव बढ़ने के बाद स्थिति हिंसक हो गई। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया और तेजाब से भरी बोतलें भी फेंकी गईं। पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट और उनकी वर्दी फाड़ने के आरोप भी सामने आए। घटना में कुछ पुलिस अधिकारियों के घायल होने की बात कही गई है। हाई कोर्ट ने कहा कि प्रशासन से अनुमति लिए बिना बड़ी सभा आयोजित करना और पुलिस की रोक के बावजूद भीड़ का आगे बढ़ना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। अदालत ने धार्मिक नारों के बीच अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘जय श्री राम’, ‘अल्लाहू अकबर’ और ‘जो बोले सो निहाल’ जैसे धार्मिक उद्घोषों को ‘सर तन से जुदा’ जैसे हिंसा की धमकी वाले नारे के समान नहीं माना जा सकता।
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One thought on “मौलाना तकीर रजा को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार”
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