
New Delhi: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए आर्थिक मोर्चे से बड़ी खबर सामने आई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 14.1 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह चालू वित्त वर्ष में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी के साथ भारत के सोने के भंडार में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।
इस उपलब्धि पर विदेश मंत्रालय और विदेशों में स्थित भारतीय राजनयिक मिशनों ने खुशी जताई है। मंत्रालय के कूटनीतिक मामलों से जुड़े आधिकारिक एक्स हैंडल ‘इंडिया डिप्लोमेसी’ ने इसे भारत की बढ़ती आर्थिक मजबूती और वैश्विक स्तर पर मजबूत होती साख का संकेत बताया।
14.1 अरब डॉलर का हुआ इजाफा
विदेश मंत्रालय की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक ही सप्ताह में 14.1 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर हो गया। यह मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक का सर्वोच्च स्तर है।
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इस बढ़ोतरी में विदेशी मुद्रा संपत्तियों और सोने के भंडार दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विदेशी मुद्रा संपत्तियों में करीब 9.9 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि सोने के भंडार में लगभग 3.9 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होने से देश को वैश्विक आर्थिक संकट, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और बाहरी वित्तीय दबावों से निपटने में मदद मिलती है।
विदेश मंत्रालय ने बताया आर्थिक मजबूती का संकेत
विदेश मंत्रालय के ‘इंडिया डिप्लोमेसी’ हैंडल ने सोशल मीडिया पर रिकॉर्ड भंडार की जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत की बाहरी आर्थिक मजबूती लगातार बढ़ रही है। मंत्रालय की इस प्रतिक्रिया को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मौजूदा समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना देश की आर्थिक क्षमता को दर्शाता है।
विदेशों में भारतीय मिशनों ने भी साझा किया डेटा
न्यूयॉर्क, ऑस्ट्रेलिया और चिली में स्थित भारतीय राजनयिक मिशनों ने भी विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़ों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। मिशनों की ओर से इसे भारत की वित्तीय स्थिरता और वैश्विक निवेशकों के बीच देश की विश्वसनीयता मजबूत करने वाला संकेत बताया गया।
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राजनयिक स्तर पर इस उपलब्धि को भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत से जोड़कर देखा जा रहा है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से वैश्विक निवेशकों को यह भरोसा मिलता है कि भारत बाहरी आर्थिक झटकों का सामना करने की बेहतर स्थिति में है।
विदेशी पूंजी आकर्षित करने के प्रयासों का असर
कूटनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का भी असर देखने को मिल रहा है। इनमें एफसीएनआर-बी डिपॉजिट स्कीम जैसे उपाय शामिल हैं।इन प्रयासों के जरिए देश में 40 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी पूंजी आने का दावा किया गया है। विदेशी पूंजी के बढ़ते प्रवाह और विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि से भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है।
रुपये और अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत सुरक्षा कवच
707 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक सुरक्षा कवच माना जा रहा है। वैश्विक मंदी, युद्ध या अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अचानक पैदा होने वाले वित्तीय दबाव जैसी परिस्थितियों में पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार देश को झटकों से बचाने में मदद करता है।
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