अमेरिका की ड्रोन डिफेंस पर बड़ा खुलासा, जनरल जारार्ड बोले- ड्रोन हमले से निपटने की तैयारी अधूरी

Washington

Washington: अमेरिका की सैन्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक वरिष्ठ अमेरिकी जनरल के बयान ने नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी नॉर्दर्न कमांड के डिप्टी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जोसेफ जारार्ड ने देश की काउंटर-ड्रोन क्षमता को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर होने वाले ड्रोन हमलों से निपटने के लिए अमेरिका के पास पर्याप्त सेंसर और प्रभावी हथियार प्रणाली मौजूद नहीं हैं।

अलबामा में आयोजितअंतरिक्ष और मिसाइल रक्षा संगोष्ठी में जारार्ड ने आधुनिक ड्रोन खतरों का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था बड़े ड्रोन झुंड का मुकाबला करने के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। उनके बयान ने अमेरिका की घरेलू वायु सुरक्षा और तेजी से बदलते युद्ध के तौर-तरीकों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ड्रोन की पहचान और निगरानी बनी बड़ी चुनौती

जारार्ड के मुताबिक अमेरिकी रक्षा व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में से एक पर्याप्त सेंसर की उपलब्धता है। देश के हर संवेदनशील इलाके में ड्रोन की पहचान और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जरूरी नेटवर्क अभी पूरी तरह विकसित नहीं है।

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NORAD मौजूदा रडार नेटवर्क पर निर्भर है और स्थानीय पुलिस तथा अन्य एजेंसियों के सेंसर और तकनीकी संसाधनों के साथ तालमेल बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक छोटे और सस्ते ड्रोन की बढ़ती उपलब्धता ने पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के सामने नई चुनौती पैदा कर दी है।

महंगे इंटरसेप्टर बनाम सस्ते ड्रोन

आधुनिक युद्ध में एक अहम समस्या लागत का असंतुलन भी है। अपेक्षाकृत कम कीमत वाले ड्रोन को रोकने के लिए यदि बेहद महंगे मिसाइल इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया जाए, तो लंबे संघर्ष में रक्षा व्यवस्था पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

ईरान के साथ हालिया संघर्ष के संदर्भ में अमेरिकी हथियार भंडार पर भी चर्चा तेज हुई है। विभिन्न आकलनों के अनुसार, संघर्ष के दौरान अमेरिका ने Tomahawk, JASSM, SM-3, SM-6, THAAD और Patriot जैसे कई महत्वपूर्ण हथियारों और इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया। इससे अमेरिका के सामने हथियारों के भंडार को दोबारा भरने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की चुनौती खड़ी हुई है।

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उत्पादन बढ़ाने पर अमेरिका का जोर

घटते भंडार की भरपाई के लिए अमेरिका अब रक्षा उत्पादन को तेज करने की दिशा में कदम उठा रहा है। Patriot और THAAD जैसी मिसाइल रक्षा प्रणालियों के उत्पादन में वृद्धि की योजनाओं के साथ Tomahawk मिसाइलों का उत्पादन भी बढ़ाने की तैयारी है।

हालांकि, उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बावजूद नई मिसाइलों और इंटरसेप्टर की पर्याप्त संख्या तैयार करने में समय लग सकता है। यही वजह है कि अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ अब केवल हथियारों की संख्या नहीं, बल्कि लंबे समय तक युद्ध जारी रखने की क्षमता यानी मैगजीन डेप्थ पर भी ध्यान दे रहे हैं।

रूस, चीन और ईरान से बढ़ती चुनौती

जनरल जारार्ड ने रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान से जुड़े संभावित खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया। ड्रोन तकनीक तेजी से सस्ती और आसानी से उपलब्ध हो रही है। ऐसे में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ एयरपोर्ट, बंदरगाह, ऊर्जा संयंत्र और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे भी ड्रोन हमलों के संभावित लक्ष्य बन सकते हैं।

यूक्रेन और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में ड्रोन के इस्तेमाल ने यह साबित किया है कि छोटे और कम लागत वाले ड्रोन भी बड़े सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। इस बदलते खतरे को देखते हुए अमेरिका को अलग-अलग एजेंसियों के सेंसर, रडार और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों को एकीकृत करने की जरूरत महसूस हो रही है।

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