
Virat, Rohit, and Harbhajan Singh: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने विराट कोहली और रोहित शर्मा के वनडे करियर को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय रखी है। हरभजन का कहना है कि किसी खिलाड़ी की उम्र से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका प्रदर्शन, फिटनेस और टीम के लिए योगदान होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर लियोनेल मेसी उम्रदराज होने के बावजूद शीर्ष स्तर पर खेल सकते हैं, तो विराट कोहली और रोहित शर्मा के लिए भी उम्र को आधार बनाकर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए।
हरभजन ने एक पॉडकास्ट बातचीत में कहा कि यदि दोनों खिलाड़ी पूरी तरह फिट हैं और टीम के लिए रन बना रहे हैं, तो उन्हें बड़े टूर्नामेंट में खेलने का मौका मिलना चाहिए। उनके मुताबिक चयन का सबसे बड़ा पैमाना प्रदर्शन होना चाहिए, न कि खिलाड़ी की उम्र।
उम्र नहीं, प्रदर्शन होना चाहिए पैमाना
हरभजन सिंह ने कहा कि विराट और रोहित ने भारतीय क्रिकेट को लंबे समय तक अपनी सेवाएं दी हैं। दोनों के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का विशाल अनुभव है और बड़े मुकाबलों में दबाव झेलने की क्षमता भी है।
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उन्होंने मेसी का उदाहरण देते हुए कहा कि उम्र बढ़ने के बावजूद अगर किसी खिलाड़ी की फिटनेस और कौशल उसे युवा खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम बनाते हैं, तो उसकी उम्र को लेकर सवाल नहीं उठने चाहिए। हरभजन के मुताबिक, आने वाले वनडे विश्व कप के समय विराट और रोहित की उम्र भले ही ज्यादा हो जाए, लेकिन अगर वे मैदान पर युवा खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं तो उन्हें टीम में रखने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
विराट-रोहित के अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
हरभजन ने कहा कि युवा खिलाड़ियों को मौका देना जरूरी है, लेकिन बड़े टूर्नामेंट में अनुभव की अपनी अहमियत होती है। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से मैच का रुख बदल सकते हैं, लेकिन विराट और रोहित के पास लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर का अनुभव है। उनके मुताबिक, दोनों दिग्गजों ने सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। ऐसे खिलाड़ियों को बड़े मंच पर संभालने और मुश्किल परिस्थितियों में टीम को आगे ले जाने का अनुभव हासिल है।
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फिटनेस पर भी हरभजन ने दिया जोर
पूर्व भारतीय स्पिनर ने साफ किया कि उम्र के साथ फिटनेस की चुनौती बढ़ती है। 35 साल की उम्र के बाद खिलाड़ी से उसी तरह की शारीरिक क्षमता की उम्मीद नहीं की जा सकती, जैसी 18 या 20 साल की उम्र में होती है।
हालांकि, अगर कोई खिलाड़ी अपनी फिटनेस पर मेहनत कर रहा है और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो उसके लिए खेलना जारी रखने का रास्ता खुला रहना चाहिए। हरभजन ने कहा कि आखिरकार खिलाड़ी को खुद महसूस होता है कि उसका शरीर कब तक उच्च स्तर के क्रिकेट का दबाव झेल सकता है।
हरभजन ने अपने संन्यास का भी किया जिक्र
हरभजन सिंह ने अपने करियर का उदाहरण देते हुए बताया कि खिलाड़ी के लिए संन्यास का फैसला आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि कई बार शरीर संकेत देने लगता है कि अब पहले जैसी क्षमता नहीं रही। उन्होंने माना कि अगर किसी खिलाड़ी में खुद को फिट रखने और लगातार प्रदर्शन करने की इच्छा और क्षमता है, तो उसे खेलते रहने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। वहीं, जब खिलाड़ी को लगे कि वह टीम की अपेक्षाओं के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है, तब उसे अपने शरीर और करियर के बारे में फैसला लेना चाहिए।
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