
शाश्वत तिवारी
India-ASEAN Cooperation : विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 22 से 23 जुलाई 2026 तक फिलीपींस के मनीला दौरे पर हैं। यात्रा के पहले दिन उन्होंने मनीला में आयोजित आसियान-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में डॉ. जयशंकर ने वैश्विक स्तर पर चल रही उथल-पुथल के बीच भारत और आसियान के मजबूत रणनीतिक संबंधों को रेखांकित किया।
भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार आसियान-भारत बैठक को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य ‘अत्यंत अशांत’ है। उन्होंने जोर देकर कहा इस अस्थिरता और व्यवधान के दौर में, सबसे स्पष्ट तनाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही उन्होंने आगाह किया कि वर्तमान भू-राजनीतिक संकट के कारण अब ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। समुद्री व्यापार पर दुनिया की निर्भरता का जिक्र करते हुए जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को अनिवार्य बताया।
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विदेश मंत्री ने कहा भारत और आसियान ने पारंपरिक रूप से व्यापक क्षेत्र की भलाई के लिए काम किया है। भारत के लिए, आसियान की केंद्रीय भूमिका एक मुख्य सिद्धांत है। इसके काम करने के तरीके का एक उदाहरण यह है कि कैसे इंडो-पैसिफिक पर आसियान का दृष्टिकोण भारत की इंडो-पैसिफिक ओशन पहल से मेल खाता है।
इस बहुपक्षीय सम्मेलन के इतर डॉ. जयशंकर ने मनीला में कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।
उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात कर कज़ान (2024) के बाद दोनों देशों के बीच सामान्य हो रहे द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स पर व्यापक चर्चा की। डॉ. जयशंकर ने कनाडा की अपनी समकक्ष अनीता आनंद के साथ सहयोग को गहरा करने तथा सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन के साथ भी रणनीतिक बातचीत की।

इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के अपने समकक्षों के साथ क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हितों को साझा किया। डॉ. जयशंकर ने इस दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ हुई मुलाकात के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा रूसी विदेश मंत्री के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों की विस्तार से समीक्षा की। क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर हमारी गंभीर चिंताओं को उनके सामने दृढ़ता से दोहराया। इसके अलावा दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी देश की स्थिति पर भी चर्चा की।
डॉ. जयशंकर 23 जुलाई को कई अन्य बड़े सुरक्षा सम्मेलनों में भाग लेंगे। वे 16वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे, जहां क्षेत्र की प्रमुख सुरक्षा चुनौतियों पर संवाद होगा। इसके बाद वे आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) की बैठक में शिरकत करेंगे, जिसका मुख्य फोकस हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी उपायों पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है।
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