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Jail सरकार के स्थानांतरण नीति की जमकर उड़ाई गई धज्जियां

कारागार विभाग में स्थानांतरण सत्र के दौरान हुए तबादलों में प्रमुख सचिव कारागार ने बड़ा खेल किया है। इस खेल की वजह से जेलों की व्यवस्थाएं चौपट हो गई है। प्रमुख सचिव कारागार ने वसूली कर शासन तक पहुंचाने वाले अधीक्षक को कट ऑफ डेट का हवाला देते हुए कमाऊ जेल पर रोक दिया वहीं दूसरी ओर एक डेढ़ साल पूर्व तैनात किए गए कई अधीक्षकों का तबादला कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों में इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। मामला हाईकमान से जुड़ा होने की वजह से जेल अधिकारियों ने इस गंभीर मसले पर चुप्पी साध रखी है।

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सूत्रों के मुताबिक कारागार विभाग के तबादलों में सरकार के स्थानांतरण नीति की जमकर धज्जियां ही नहीं उड़ाई गई बल्कि नीति में दिए गए निर्देशों का अनुपालन तक नहीं किया गया। सूत्र बताते हैं कि आगरा जिला जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा का जेल पर तीन साल कार्यकाल पूरा हो चुका था। प्रमुख सचिव कारागार ने इनके स्थानांतरण कट ऑफ डेट 31 मार्च बताकर स्थानांतरण नहीं किया। वहीं दूसरी ओर वर्ष 2025-26 के स्थानांतरण सत्र में स्थानांतरित होकर सहारनपुर आए जेल अधीक्षक सत्य प्रकाश को सहारनपुर से हटाकर आजमगढ़ जेल पर भेज दिया गया। इसी प्रकार करीब एक साल पहले मध्य सत्र ने मोटी रकम देकर बांदा से मुरादाबाद जेल भेजे गए आलोक सिंह को सहारनपुर जेल पर स्थानांतरित कर दिया गया। करीब 10 माह पूर्व जेलर से अधीक्षक पद पर प्रोन्नत हुए राजेश कुमार सिंह को कांसगंज भेजा गया था। अभी कांसगंज में एक साल भी पूरा नहीं हुआ था कि उन्हें कांसगंज से बिजनौर जेल स्थानांतरित कर दिया गया। यह तो बानगी है इसी प्रकार दर्जनों की संख्या में अधीक्षकों के उल्टे सीधे तबादले तबादले कर दिए गए। पैसा देने वालों को कमाऊ और पैसा नहीं देने वालों को सामान्य जेलों पर स्थानांतरित कर दिया गया।

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सूत्रों का कहना है आगरा जिला जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा की वसूली को लेकर जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह से शिकायत की गई। इसके अलावा जेल में खुलेआम हो रही अवैध वसूली का एक वीडियो वायरल हुआ और जेल में क्रिप्टो करेंसी के मामले में जेल आए एक बंदी से दो करोड़ की मांग करने वाले अधीक्षक को जेल से हटाने के बजाए स्थानांतरण की कट ऑफ डेट का हवाला देकर उसी जेल पर रोक दिया गया जबकि एक साल पहले स्थानांतरित होकर आए कई जेल अधीक्षकों को अन्यत्र जेलों पर स्थानांतरित कर दिया गया। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि अवैध वसूली कर शासन तक पहुंचाने वालों को रोक दिया गया, वहीं नहीं देने वालों को स्थानांतरित कर दिया गया। इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।

अधिष्ठान वाली जेलों पर कर दी अधीक्षकों की तैनाती

प्रमुख सचिव कारागार के बेतरतीब तबादलों से जेलों की व्यवस्थाएं चौपट हो गई है। प्रदेश की मंडलीय कारागारों पर वरिष्ठ अधीक्षक के बजाए अधीक्षक तैनात कर दिए गए हैं वहीं जिन जेलों पर वरिष्ठ अधीक्षकों की तैनाती होनी चाहिए वह अधीक्षक तैनात है। इस मामले पर विभागीय अधिकारियों तर्क है कि अधिकारियों की कमी की वजह से ऐसा किया गया है। मालूम हो कि वर्तमान समय में एक वरिष्ठ अधीक्षक व तीन अधीक्षक निलंबित चार रहे है। इसके अलावा डीआईजी से एआईजी पद पर मई माह में होने वाली डीपीसी की तिथि अभी तक तय नहीं हो पाई है। वहीं विभाग अधिकारियों की कमी का रोना रो रहा है।

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