राम के नाम पर लूट…एक था रामालय ट्रस्ट

Ramalaya Trust
आचार्य संजय तिवारी
आचार्य संजय तिवारी

Ramalaya Trust अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और दान में गड़बड़ी को लेकर व्यापक बहस चल रही। इस बहस में वे लोग काफी बढ़ चढ़ कर आगे आ रहे जिन्होंने या तो राम के अस्तित्व पर सवाल उठाये थे उस राम मंदिर के निर्माण में बढ़ चढ़ कर बाधा डाली थी। मंदिर के चढ़ावे में हुई गड़बड़ी की जांच चल रही, ट्रस्ट के दो लोगों ने इस्तीफा सौंप दिया और कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं। इसी के साथ एक गंभीर प्रश्न और खड़ा हुआ है। श्रीराम जन्मभूमि के लिए ही एक रामालय ट्रस्ट भी बना था। उस ट्रस्ट को भी बहुत दान मिला। वह ट्रस्ट बनाने वालों ने वादा किया था कि दान का प्रयोग राम मंदिर के निर्माण में होगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आखिर उस दान का क्या हुआ?

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उस ट्रस्ट और उसकी चंदा उगाही का क्या हुआ, इस पर अब दृष्टि डालने का समय है। अयोध्या में श्री रामजन्मभूमि पर स्व राजीव गांधी जी के शिलान्यास करने के बाद 1994 में रामालय ट्रस्ट का गठन किया गया था जिसने 2019 तक राम मंदिर बनाने के नाम पर चंदा लिया है। इसके मुख्य ट्रस्टी उस समय के द्वारिका पीठाधीश्वर श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज थे। एक सदस्य इसमें रामानंदाचार्य रामनरेशाचार्य जी महाराज भी थे। कुल 25 सदस्य थे, जिन्होंने राम मंदिर बनाने का दावा किया था किंतु राम जन्मभूमि न्यास का गठन होने पर यह ट्रस्ट निष्क्रिय हो गया, इसका चंदा कहां गया। इसका भी पता लगाया जाना चाहिए।

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रामालय ट्रस्ट द्वारा 1,008 किलो सोना जुटाने का अभियान घोषित और प्रचारित हुआ था, लेकिन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितना सोना वास्तव में एकत्र हुआ, उसका अंतिम हिसाब क्या है, और वह कहाँ है। इस पर पारदर्शी सार्वजनिक ऑडिट रिपोर्ट फिलहाल उपलब्ध नहीं दिखती। जितना सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है, उसके आधार पर स्थिति यह है कि रामालय ट्रस्ट का 1,008 किलो सोना अभियान वास्तविक था। फरवरी 2020 में रामालय ट्रस्ट के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने “स्वर्ण संग्रह सपर्या” अभियान की घोषणा की थी। दावा था कि 7 लाख गांवों से 1,008 किलो सोना एकत्र किया जाएगा।

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इसमें 108 किलो सोने से अस्थायी “स्वर्णालय” बनाया जाना था और 900 किलो बाद में भव्य राम मंदिर के लिए समर्पित किया जाना था। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह नहीं मिलता कि वास्तव में कितना सोना एकत्र हुआ; वह किस बैंक लॉकर, ट्रस्ट खाते या सुरक्षित भंडारण में रखा गया; उसका वैधानिक ऑडिट हुआ या नहीं; उसकी कोई वार्षिक रिपोर्ट, सार्वजनिक बैलेंस शीट या उपयोग का विवरण जारी किया गया। रामालय ट्रस्ट की आय-व्यय संबंधी विस्तृत सार्वजनिक रिपोर्ट आसानी से उपलब्ध नहीं दिखती। कम-से-कम समाचार रिपोर्टों, सार्वजनिक दस्तावेजों और उपलब्ध स्रोतों में 1,008 किलो सोना अभियान के अंतिम परिणाम का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं मिला। राम के नाम पर यह बहुत बड़ी लूट है। इस पर भी चर्चा होनी चाहिए। इसका लेखा जोखा भी सामने आना चाहिए।

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