
Jail परिक्षेत्र की अलीगढ़ और आगरा जेल से मिलती सबसे अधिक वसूली
परिक्षेत्र की आगरा, अलीगढ़, फिरोजाबाद, मथुरा, एटा, मैनपुरी, सेंट्रल जेल और कांसगंज के आते लिफाफे
आगरा परिक्षेत्र के जेल डीआईजी ने वसूली के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए है। परिक्षेत्र की आठ जेलों से प्रतिमाह 12 लाख रुपए की रकम वसूल की जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि डीआईजी कारागार मुख्यालय के साथ आगरा परिक्षेत्र की जेलों का काम देख रहे है। सप्ताह में पांच दिन यह कारागार मुख्यालय में और मात्र दो दिन परिक्षेत्र में रहते हैं। परिक्षेत्र में मात्र दो दिन काम करने वाले डीआईजी के प्रतिमाह इतनी मोटी रकम वसूल करने का मामला विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है।
विभागीय जानकारों से मिली जानकारी के मुताबिक महानिदेशक कारागार की ओर जारी परिपत्र में कहा गया है कि प्रत्येक डीआईजी कारागार अपने परिक्षेत्र की प्रत्येक जेल का दो माह में एक बार विस्तृत निरीक्षण करेंगे और तीन माह में अपने परिक्षेत्र की प्रत्येक जेल का एक बार आकस्मिक निरीक्षण किया जाना सुनिश्चित करेंगे। इसके अलावा अपने परिक्षेत्र की प्रत्येक जेल का छह छह माह में एक बार रात्रि सुरक्षा भ्रमण करेंगे। विस्तृत निरीक्षण के दौरान गल्ला गोदाम में राशन की नापतौल, एमएसके की खरीद फरोख्त समेत अन्य दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल करेंगे। यह काम नहीं करने के कारण डीआईजी को जेलों की ओर से प्रतिमाह लिफाफे दिए जाते हैं।
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वर्तमान समय में आगरा परिक्षेत्र में आगरा जिला जेल, आगरा सेंट्रल जेल, अलीगढ़, मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा, मथुरा, कासगंज आठ जेल हैं। सूत्र बताते है कि डीआईजी आगरा को अलीगढ़ जेल से 2.5 लाख, जिला जेल आगरा से 2.0 लाख के अलावा परिक्षेत्र कार्यालय का पूरा खर्च, फिरोजाबाद से 2.0 लाख, मैनपुरी से 1.5 लाख, एटा से एक लाख, मथुरा से एक लाख, सेंट्रल जेल आगरा से 80 हजार और कांसगज जेल से सबसे कम 50 हजार रुपए प्रतिमाह का लिफाफा मिलता है। उधर इस अवैध वसूली के संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।
जेलों में तैनाती के दौरान भी विवादों से रहा गहरा नाता
डीआईजी कारागार मुख्यालय और आगरा परिक्षेत्र विवादों को लेकर काफी सुर्खियों में रहे। सेंट्रल जेल नैनी और फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में तैनाती के दौरान कैदियों की समय पूर्व रिहाई का गलत प्रस्ताव भेजने का मामला सुर्खियों में रहा। राजधानी की जेल में तैनाती के दौरान जेल में बंद पूर्व मंत्री के वाराणसी क्विक व्यवसायी को फोन पर धमकी दिए जाने और सेंट्रल जेल नैनी और कारागार मुख्यालय में महिला प्रेम को लेकर भी इन्होंने जमकर सुर्खियों बटोरी।
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