बलिदान दिवस पर मोदी ने दी पितामह मुखर्जी को श्रद्धांजलि

Shyama Prasad Mukherjee

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की श्रद्धांजलि सभा में विकसित भारत के संकल्प को दोहराया

कश्मीर में धारा 370 हटाने की पहली वकालत करने वाले शख्स थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी

नया लुक ब्यूरो/वार्ता

Shyama Prasad Mukherjee : आज जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) दिख रही है, ये अपने जीवन की आहुति देने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का संगठन है। आज भी बीजेपी जब कश्मीर की बात करती है तो डॉ. मुखर्जी का जिक्र बारम्बार आता है। ‘जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वह कश्मीर हमारा है…’ ये नारा भाजपा के लोग अक्सर लगाते हुए दिख जाते हैं। हालांकि बीजेपी अब कश्मीर से धारा 370 खत्म कर चुकी है और जम्मू-कश्मीर के तीन टुकड़े भी हो चुके हैं। बताते चलें कि कश्मीर में उमर अब्दुल्लाह वर्तमान में मुख्यमंत्री हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार यानी उनके बलिदान दिवस पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

PM मोदी ने मुखर्जी को एक विशिष्ट राष्ट्रभक्त, विद्वान और राजनेता बताते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए उनका आजीवन समर्पण आज भी भारत की पीढ़ियों को प्रेरित करता है। PM ने सोशल मीडिया पर डॉ. मुखर्जी के सार्वजनिक जीवन में योगदान को याद करते हुए देश के हितों के प्रति उनके समर्पण पर बल दिया। मोदी ने लिखा कि बलिदान दिवस पर मैं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देता हूं, जो एक महान देशभक्त, विद्वान और राजनेता थे जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया।

PM  ने डॉ. मुखर्जी के साहस और दृढ़ विश्वास की सराहना करते हुए कहा कि उनकी विरासत समकालीन भारत में भी प्रासंगिक है। मोदी ने कहा कि उनका अटूट विश्वास,सार्वजनिक जीवन में हिम्मत और देश के हित के लिए समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। डॉ. मुखर्जी का बलिदान हमारी यादों में रहेगा। राष्ट्र निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की विकास यात्रा आगे भी डॉ मुखर्जी द्वारा प्रतिपादित आदर्शों से प्रेरित और निर्देशित होती रहेगी।  PM मोदी ने कहा कि हम एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण के अपने संकल्प को दोहराते हैं, जो उन मूल्यों से प्रेरित है जिन्हें उन्होंने जीवन की अंतिम सांस तक संजोया और उनकी सेवा की।

उल्लेखनीय है कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. मुखर्जी को देश की एकता की वकालत करने और अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जा का विरोध करने के लिए याद किया जाता है। जम्मू-कश्मीर में हिरासत में रहते हुए 23 जून, 1953 को उनकी मृत्यु हो गई। उनकी निधन पर आज के दिन प्रतिविर्ष भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े संगठन हर साल बलिदान दिवस के तौर पर मनाते हैं।

कौन थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी

विकीपीडिया के अनुसार डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे। 1943 से 1946 तक वे अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष भी रहे। डॉ॰ मुखर्जी ने स्वेच्छा से अलख जगाने के उद्देश्य से राजनीति में प्रवेश किया। मुखर्जी सच्चे अर्थों में मानवता के उपासक और सिद्धान्तवादी थे। उन्होंने बहुत से गैर कांग्रेसी हिन्दुओं की मदद से कृषक प्रजा पार्टी से मिलकर प्रगतिशील गठबन्धन का निर्माण किया। इस सरकार में वे वित्तमन्त्री बने। इसी समय वे सावरकर के राष्ट्रवाद के प्रति आकर्षित हुए और हिन्दू महासभा में सम्मिलित हुए।

मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। उस समय जम्मू कश्मीर का अलग झण्डा और अलग संविधान था। वहाँ का मुख्यमन्त्री वजीर-ए-आज़म अर्थात् प्रधानमन्त्री कहलाता था। संसद में अपने भाषण में डॉ मुखर्जी ने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की थी। अगस्त 1952 में जम्मू की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊँगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूँगा। उन्होंने तात्कालिन नेहरू सरकार को चुनौती दी तथा अपने दृढ़ निश्चय पर अटल रहे। अपने संकल्प को पूरा करने के लिए वे 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहाँ पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर नज़रबन्द कर लिया गया। 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई।

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