रेल नीर प्लांट कैसे लगाएं? जानिए लागत, कमाई और देशभर में कहां-कहां हैं इसके 19 प्लांट

Rail Neer Plant

देशभर में संचालित हैं 19 रेल नीर प्लांट

Rail Neer Plant: रेल यात्रा के दौरान स्टेशन हो या ट्रेन का कोच, यात्रियों को सबसे अधिक भरोसा जिस बोतलबंद पानी पर होता है, वह है रेल नीर (Rail Neer)। भारतीय रेलवे यात्रियों को हमेशा रेल नीर खरीदने की सलाह देता है, क्योंकि यह शुद्ध, सुरक्षित और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किया जाता है। फिलहाल 1 लीटर रेल नीर की कीमत 14 रुपये है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह पानी पूरे देश में कैसे पहुंचता है, इसे कहां बनाया जाता है और इससे रेलवे की कितनी कमाई होती है? आइए जानते हैं पूरी जानकारी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में जानकारी दी कि वर्तमान में देश के विभिन्न राज्यों में कुल 19 रेल नीर प्लांट संचालित हैं। इन प्लांटों के जरिए प्रमुख रेलवे स्टेशनों और लंबी दूरी की ट्रेनों तक प्रतिदिन लाखों पानी की बोतलें पहुंचाई जाती हैं।

इन राज्यों में हैं रेल नीर के प्लांट

  • दिल्ली – नांगलोई
  • बिहार – दानापुर
  • महाराष्ट्र – अंबरनाथ, नागपुर, भुसावल
  • तमिलनाडु – पालूर
  • मध्य प्रदेश – मनेरी, मंडीदीप
  • उत्तर प्रदेश – अमेठी, हापुड़
  • हिमाचल प्रदेश – ऊना
  • असम – जागीरोड
  • पश्चिम बंगाल – संकराइल
  • राजस्थान – कोटा
  • गुजरात – साणंद
  • ओडिशा – भुवनेश्वर
  • छत्तीसगढ़ – बिलासपुर
  • आंध्र प्रदेश – सिम्हाद्री, विजयवाड़ा

IRCTC संभालता है पूरी व्यवस्था

रेल नीर के उत्पादन और वितरण की जिम्मेदारी IRCTC (Indian Railway Catering and Tourism Corporation) के पास है। जरूरत और मांग के अनुसार विभिन्न स्थानों पर प्लांट स्थापित किए जाते हैं। अधिकांश प्लांट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित होते हैं, जहां निजी कंपनियां उत्पादन और बॉटलिंग का काम करती हैं, जबकि ब्रांड और वितरण का नियंत्रण IRCTC के पास रहता है।

रोजाना बनती हैं लाखों बोतलें

एक रेल नीर प्लांट की औसत क्षमता करीब 1 लाख बोतल प्रतिदिन होती है। आधुनिक RO, UV और अन्य हाईटेक तकनीकों से पानी को शुद्ध किया जाता है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।

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रेल नीर की लागत और रेलवे की कमाई

रेल मंत्रालय के अनुसार, एक लाख बोतल प्रतिदिन क्षमता वाले प्लांट को स्थापित करने में लगभग 10 करोड़ रुपये का खर्च आता है। इसमें भवन, मशीनरी और अन्य उपकरण शामिल होते हैं, जबकि जमीन की कीमत इसमें शामिल नहीं होती। एक बोतल तैयार करने में पानी शुद्ध करने, PET बोतल, कैप, लेबल और पैकेजिंग सहित लगभग 5 से 6.50 रुपये की लागत आती है।

इसके बाद ट्रांसपोर्ट, लोडिंग-अनलोडिंग और अधिकृत विक्रेताओं का कमीशन जोड़कर यह बोतल यात्रियों तक 14 रुपये में पहुंचती है। IRCTC के वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक रेल नीर सेगमेंट का EBIT प्रॉफिट मार्जिन करीब 8 से 9 प्रतिशत है। यानी 14 रुपये की एक बोतल पर लगभग 1.10 से 1.30 रुपये का शुद्ध लाभ IRCTC को मिलता है।

क्या आप भी लगा सकते हैं रेल नीर प्लांट?

यदि आप रेल नीर का प्लांट लगाना चाहते हैं तो इसके लिए IRCTC से अधिकृत बॉटलिंग प्लांट या फ्रेंचाइजी के लिए आवेदन करना होगा।

इसके लिए आवश्यक शर्तें:

  • 2,000 से 4,000 वर्गमीटर भूमि
  • पर्याप्त और स्वीकृत जल स्रोत
  • लगभग 4 से 8 करोड़ रुपये का निवेश
  • BIS प्रमाणन
  • FSSAI लाइसेंस
  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की NOC

इन सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद IRCTC की निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया जा सकता है।

यात्रियों को क्या फायदा?

रेल नीर का उद्देश्य यात्रियों को उचित कीमत पर सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना है। देशभर में प्लांट स्थापित होने से रेलवे स्टेशनों पर पानी की उपलब्धता बढ़ी है और नकली या घटिया गुणवत्ता वाले बोतलबंद पानी की बिक्री पर भी काफी हद तक रोक लगी है। यही वजह है कि भारतीय रेलवे आज भी रेल नीर को यात्रियों के लिए सबसे भरोसेमंद पेयजल ब्रांड के रूप में बढ़ावा देता है।

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