
इतना बड़ा आतंकी हमला कि थर्रा उठा पूरा देश
सादियो कैमारा की मौत, सैन्य सरकार को अब तक का सबसे बड़ा झटका
नया लुक डेस्क
Mali Terrorist Attack यह खबर सुनकर आप सन्न रह जाएंगे। आतंकी हमले में देश के रक्षामंत्री की मौत हुई है। वो भी तब जब देश में सैन्य सरकार चल रही है। पूरे देश में हुए सिलसिलेवार हमले में रक्षा मंत्री जनरल सादियो कैमारा की मौत हो गई है। सैन्य सूत्रों ने इस खबर की पुष्टि की है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार जनरल कैमारा की मौत को माली की वर्तमान सैन्य सरकार के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। यह हमला काती में हुआ, जिसे माली का सबसे सुरक्षित इलाका माना जाता है। यह स्थान राजधानी बमाको से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर है।
बताते चलें कि इसी शहर में अंतरिम राष्ट्रपति असिमी गोइता भी रहते हैं। हमलावरों ने कैमारा के आवास पर आत्मघाती कार बम का इस्तेमाल किया। जानकारों की नजर में काती एक महत्वपूर्ण सैन्य छावनी वाला शहर है। आतंकियों ने केवल काती को ही नहीं, बल्कि बमाको, गाओ, किदाल और सेवाने सहित कई अन्य स्थानों को भी निशाना बनाया। रविवार को भी उत्तरी किदाल में भारी गोलीबारी और धमाकों की आवाजें सुनी गईं। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि यह ऑपरेशन काफी लम्बा खिंच रहा है। आने वाले दिनों में रणनीतिक ठिकानों पर नियंत्रण के लिए और भी भीषण जंग देखने को मिल सकती है।
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अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार एक दिन पहले काती स्थित उनके आवास को निशाना बनाया गया था। अल-कायदा से जुड़े एक गुट और तुआरेग विद्रोहियों ने मिलकर देश के कई सैन्य ठिकानों पर एक साथ हमला बोला था। जनरल सादियो कैमारा माली की सैन्य सरकार के सबसे प्रभावशाली स्तंभ थे। उन्होंने वर्ष 2020 और 2021 में तख्तापलट के जरिए सत्ता हासिल की थी। कैमारा न केवल एक शक्तिशाली मंत्री थे, बल्कि उन्हें भविष्य के संभावित राष्ट्रपति के तौर पर भी देखा जा रहा था। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत देश की सेना के लिए एक बहुत बड़ा आघात है।
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इस हमले की जिम्मेदारी संयुक्त रूप से अल-कायदा से जुड़े जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन (JNIM) और तुआरेग विद्रोहियों के अजावाद लिबरेशन फ्रंट (FLA) ने ली है। इतने भीषण हमले के बाद भी माली के राष्ट्रपति असिमी गोइता पूरी तरह सुरक्षित हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने टीवी चैनलों को बताया कि हमले के तुरंत बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया, जहां से वे सेना की कमान संभाल रहे हैं। वहीं, दो अलग-अलग विचारधारा वाले समूह JNIM और FLA कभी आपस में लड़ते थे, अब माली सरकार के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। अल जजीरा ने विश्लेषक बुलामा बुखार्ती के हवाले से बताया है कि पिछले साल इन दोनों गुटों के बीच एक समझौता हुआ था। हालिया हमले उसी खतरनाक गठबंधन का नतीजा हैं।
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