‘क्विक डील’ से बड़ी कूटनीतिक जीत की तैयारी में ट्रंप? होर्मुज को लेकर नई रणनीति पर नजर

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ट्रंप

नया लुक डेस्क

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। पाकिस्तान में आज दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच अहम वार्ता प्रस्तावित है। इस बातचीत का नेतृत्व अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा किए जाने की संभावना है, जो इस्लामाबाद में ईरानी प्रतिनिधियों से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि वार्ता से पहले अमेरिकी पक्ष की ओर से सख्त बयान सामने आए हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को लेकर तीखे तेवर अपनाते हुए कहा है कि अगर तेहरान किसी समझौते पर नहीं पहुंचता है तो उसे “भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी। इसी बीच विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की रणनीति किसी लंबी प्रक्रिया के बजाय एक “क्विक डील” यानी जल्दी हासिल होने वाली बड़ी कूटनीतिक सफलता पर केंद्रित हो सकती है, जिसे वे अपनी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहेंगे।

ट्रंप प्रशासन का मुख्य फोकस क्या है?

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत और इराक में अमेरिका के पूर्व राजदूत डगलस सिलीमन ने संकेत दिया है कि ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता ईरान के साथ लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करना हो सकती है। साथ ही इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव को कम करना भी बताया गया है। सिलीमन के मुताबिक, ट्रंप ऐसी किसी डील की तलाश में रहेंगे जिसे वे जल्दी और स्पष्ट “जीत” के रूप में प्रस्तुत कर सकें।

संभावित समझौते के तीन बड़े बिंदु

  • ईरान से अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को बाहर निकालना,
  • ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह बंद कराना,
  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह खोलना,

होर्मुज: रणनीतिक ताकत या वैश्विक संकट का बिंदु?

पूर्व राजदूत सिलीमन ने यह भी कहा कि इस पूरे संघर्ष में ईरान की एक बड़ी रणनीतिक ताकत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए समुद्री यातायात पर दबाव बनाना रहा है। यह मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि यहां बाधा उत्पन्न होती है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए अमेरिका ईरान को कुछ रियायतें देने पर भी विचार कर सकता है। हालांकि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान अन्य मुद्दों पर बातचीत के लिए कितना तैयार होता है।

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