यूएन में बोला भारत: यौन हिंसा रोकने में भारतीय महिला पीसकीपर्स आगे

India at the UN

 शाश्वत तिवारी

India at the UN : संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ‘संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा’ (CRSV) पर आयोजित खुली बहस में वैश्विक मंच पर भारत का कड़ा रुख प्रस्तुत किया। भारत ने संघर्ष के दौरान होने वाली यौन हिंसा की तीव्र भर्त्सना करते हुए इसे युद्ध, आतंकवाद, प्रताड़ना और राजनीतिक दमन का एक घिनौना हथियार बताया। भारतीय राजदूत ने कहा कि ऐसे अमानवीय कृत्य समुदायों को दबाने, असंतोष को कुचलने और इंसानी पीड़ा को बढ़ाने के इरादे से किए जाते हैं, जिन्हें किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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न्यूयॉर्क स्थित UN में भारत के स्थायी मिशन ने एक बयान में बताया अपने संबोधन में राजदूत हरीश ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने रेखांकित किया कि साल 2025 में सत्यापित मामलों में भारी उछाल और इनमें देखी गई अत्यधिक क्रूरता बेहद चिंताजनक है। उन्होंने वैश्विक बिरादरी को आगाह किया कि अपराधियों में सजा का डर न होना यानी ‘दोषमुक्ति की संस्कृति’ इस अपराध को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में इस गंभीर वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए सभी सदस्य देशों को बिना किसी देरी के एकजुट होकर सामूहिक कार्रवाई करने की सख्त जरूरत है।

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स्थायी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों (UN पीसकीपिंग) में भारत के ऐतिहासिक और मार्गदर्शक योगदान को भी गर्व से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संघर्ष क्षेत्रों में भारतीय महिला शांति सैनिकों की तैनाती ने यौन हिंसा को रोकने और स्थानीय समुदायों में सुरक्षा की भावना जगाने में एक ‘परिवर्तनकारी प्रभाव’ डाला है। भारत ने इस क्षेत्र में हमेशा अग्रगामी भूमिका निभाई है, जिसका वैश्विक स्तर पर सकारात्मक असर दिखा है।
हरीश ने एक बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि दो भारतीय शांति सैनिकों, मेजर मोइज़ यासीन और मेजर सोनिया देवेंद्र नेवासकर, को संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा को रोकने के उनके उत्कृष्ट प्रयासों के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा सम्मानित किया जा रहा है। इन दोनों अधिकारियों को ‘2026 यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर रिकॉग्निशन सर्टिफिकेट’ से नवाजा जाएगा। भारत ने इस सम्मान को अपने जांबाजों की कर्तव्यनिष्ठा और लैंगिक समानता व सुरक्षा के प्रति देश की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

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