मणिशंकर अय्यर के बयानों से अब कांग्रेस में हंगामा

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अजय कुमार

केरल चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। शशि थरूर का मामला अभी सुलझा भी नहीं पाया था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने नया विवाद खड़ा कर दिया। अय्यर ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के बारे में ऐसा बयान दिया कि पूरी पार्टी सकते में आ गई। उन्होंने कहा कि पिनराई विजयन मुख्यमंत्री बने रहेंगे। इस बयान ने पार्टी में हड़कंप मचा दिया। कांग्रेस ने तुरंत सफाई दी कि अय्यर अब पार्टी के सदस्य नहीं हैं। लेकिन मामला यहीं शांत होने वाला नहीं था। अय्यर ने फिर से एक साक्षात्कार में पार्टी के कई बड़े नेताओं पर हमला बोला। उन्होंने पवन खेड़ा को कठपुतली कहा और शशि थरूर तथा जयराम रमेश पर भी तीखे प्रहार किए। अय्यर का कहना था कि केरल में आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीत नहीं पाएगी। कारण बताया कि कांग्रेसी नेता कम्युनिस्टों से जितनी नफरत करते हैं, उससे कहीं ज्यादा आपस में नफरत करते हैं। इन बयानों ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।वैसे अय्यर की नाराजगी पुरानी नहीं है। वे लंबे समय से पार्टी नेतृत्व की आलोचना करते आ रहे हैं। लेकिन इस बार उनके शब्दों ने चुनावी माहौल को गरमा दिया। केरल में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस को मजबूत विपक्ष के रूप में उभरना था। माकपा सरकार के खिलाफ लामबंदी करनी थी। लेकिन आंतरिक कलह ने सबकी मुश्किलें बढ़ा दीं। अय्यर ने पिनराई विजयन को मुख्यमंत्री बने रहने का भरोसा जताया तो यह पार्टी के लिए अपमानजनक लगा। विजयन लेफ्ट सरकार के चेहरे हैं और कांग्रेस का मुख्य निशाना। ऐसे में किसी पूर्व नेता का यह बयान तोड़फोड़ जैसा ही था। पार्टी ने कहा कि अय्यर का नाम सदस्य सूची से हटा दिया गया है। फिर भी अय्यर चुप नहीं रहे। उन्होंने साक्षात्कार में कहा कि पवन खेड़ा जैसे नेता सिर्फ उच्च नेतृत्व के इशारे पर बोलते हैं। शशि थरूर को महत्वाकांक्षी बताया और जयराम रमेश पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं। इन हमलों ने पार्टी के केरल नेतृत्व को असहज कर दिया।

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यह पहली बार नहीं है जब मणिशंकर अय्यर ने विवादास्पद बयान दिए हों। 2017 में उन्होंने पाकिस्तान के एक कार्यक्रम में जाकर नेहरू को गंगा-मैया का पुत्र कहा था। उस समय भी पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। फिर 2019 लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीच कहा था। यह बयान सुर्खियों में रहा और पार्टी को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। अय्यर ने सफाई दी कि उनका इशारा मोदी की सोच पर था, लेकिन नुकसान हो चुका था। केरल में भी वे कई बार लेफ्ट नेताओं की तारीफ कर चुके हैं। एक बार उन्होंने कहा था कि पिनराई विजयन अच्छा प्रशासक हैं। ऐसे बयान विपक्षी एकता को कमजोर करते हैं। अब फिर से चुनावी साल में यही गलती दोहराई गई। विश्लेषकों का मानना है कि अय्यर की नाराजगी पार्टी के पुराने नेताओं के साथ उपेक्षा से उपजी है। वे खुद कभी केंद्रीय मंत्री रहे, लेकिन अब हाशिए पर हैं। उनकी बात को युवा नेता नजरअंदाज करते हैं। इससे उनकी भड़ास निकल रही है। कांग्रेस के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। केरल में लेफ्ट और भाजपा दोनों मजबूत हैं। 2021 चुनाव में कांग्रेस ने विपक्षी गठबंधन के नेतृत्व में अच्छा प्रदर्शन किया था। लेकिन इस बार आंतरिक मतभेद साफ दिख रहे हैं। शशि थरूर जैसे नेता अपनी दावेदारी कर रहे हैं। अय्यर ने उनकी आलोचना कर फूट डाली। पार्टी नेतृत्व ने अय्यर से दूरी बनाई, लेकिन उनका प्रभाव अभी भी है। सोशल मीडिया पर उनके बयान वायरल हो रहे हैं। विपक्षी दल इसका फायदा उठा रहे हैं। भाजपा कह रही है कि कांग्रेस कम्युनिस्टों की कठपुतली है। लेफ्ट का तर्क है कि कांग्रेसी आपस में ही लड़ रहे हैं। अय्यर के बयान ने यह धारणा मजबूत कर दी। पार्टी को अब एकजुट होने की जरूरत है। लेकिन पुराने विवाद फिर ताजा हो गए। अय्यर की नाराजगी बढ़ती जा रही है। वे कहते हैं कि कांग्रेस का वर्तमान स्वरूप बदल गया है। पहले सिद्धांतों पर चलती थी, अब व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं हावी हैं।

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इस पूरे घटनाक्रम से केरल कांग्रेस की रणनीति पर असर पड़ेगा। चुनाव में जीत के लिए एकजुटता जरूरी है। लेकिन नेताओं के आपसी हमले मतदाताओं को निराश कर रहे हैं। अय्यर जैसे वरिष्ठ नेता अगर बाहर से ही आलोचना करेंगे तो संगठन कमजोर होगा। पार्टी को चाहिए कि पुराने विवाद सुलझाए। नए नेताओं को साथ ले। केरल मतदाता समझदार हैं। वे आंतरिक कलह देखकर वोट नहीं देंगे। अय्यर को शांत करने की कोशिश होनी चाहिए। लेकिन उनका पुराना इतिहास देखें तो मुश्किल लगता है। वे अपनी बात पर अड़े रहते हैं। अब देखना यह है कि पार्टी कैसे इस संकट से उबरती है। चुनाव नजदीक हैं और हर बयान गूंज रहा है। कांग्रेस को मजबूत विपक्ष बनना होगा, वरना लेफ्ट फिर सत्ता में लौट आएगा। अय्यर का सिरदर्द अभी बना रहेगा।केरल चुनाव से पहले कांग्रेस को मणिशंकर अय्यर ने परेशान कर दिया। शशि थरूर का मुद्दा सुलझा नहीं कि अय्यर ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को बने रहने का भरोसा जताया। पार्टी ने कहा, वे अब सदस्य नहीं। फिर साक्षात्कार में अय्यर ने पवन खेड़ा को कठपुतली कहा, शशि थरूर और जयराम रमेश पर तीखे वार किए। बोले, कांग्रेसी आपस में कम्युनिस्टों से ज्यादा नफरत करते हैं, इसलिए चुनाव हारेंगे। लेकिन अय्यर का इतिहास विवादों से भरा है, खासकर मोदी और भाजपा के खिलाफ।

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बहरहाल,अय्यर ने आज भले ही कांग्रेस के खिलाफ हमला बोला हो,लेकिन उनकी असली पहचान मोदी को गाली देने वाली है।अय्यर ने   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर  कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमले किए हैं। 2019 चुनाव से पहले उन्होंने मोदी को नीच कहा। सफाई दी कि नीच सोच की बात की, लेकिन बवाल मच गया। पार्टी ने निलंबन दिया। 2017 में पाकिस्तान जाकर नेहरू पर टिप्पणी की, जिसे भाजपा ने भुनाया। अय्यर ने भाजपा को सांप्रदायिक बताया। कहा, वे हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। राम मंदिर पर बोले, भाजपा का ढोंग है। 2024 चुनाव में भी मोदी की आलोचना की, किसान आंदोलन पर समर्थन दिया। भाजपा ने उन्हें कांग्रेस का असली चेहरा कहा। केरल में लेफ्ट की तारीफ कर भाजपा को निशाना बनाया। अय्यर का मानना है कि भाजपा लोकतंत्र को कुचल रही,ये बयान कांग्रेस को नुकसान पहुंचाते हैं। केरल में भाजपा मजबूत हो रही, आंतरिक कलह से फायदा। अय्यर की नाराजगी पुरानी है। पार्टी को एकजुट होना चाहिए। वरना चुनावी हार निश्चित। अय्यर मोदी-भाजपा विरोध में आग उगलते रहेंगे, लेकिन पार्टी का सिरदर्द बढ़ेगा।

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