- आशीर्वाद सुपर हास्पिटल के सर्जन डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने दर्द से पीड़ित महिला की बचाई जान
विजय श्रीवास्तव
लखनऊ रायबरेली रोड स्थित साउथ सिटी के आशीर्वाद सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद जटिल और जोखिम भरा ऑपरेशन कर महिला को नई जिंदगी दी। लंबे समय से पेट दर्द से पीड़ित महिला के पेट से करीब 10 किलो का विशाल ट्यूमर सफल सर्जरी के जरिए निकाला गया। कैंसर सर्जन डॉ. मनोज श्रीवास्तव, असिस्टेंट डॉ. आशुतोष और उनकी टीम ने लगभग साढ़े तीन घंटे तक चले ऑपरेशन में बड़ी गांठ के साथ कई छोटी गांठें और प्रभावित झिल्ली को हटाया, जिससे मरीज की जान बच सकी।
बेहद जोखिम भरा था ऑपरेशन
सर्जन डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि यह ऑपरेशन काफी जटिल और जोखिमपूर्ण था। ओवरी में बनी गांठ इतनी बड़ी हो चुकी थी कि वह आंतों को दबा रही थी। साथ ही हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली नसों और मूत्र मार्ग पर भी दबाव बना हुआ था। ऐसे में सर्जरी करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन टीम के प्रयास से ऑपरेशन सफल रहा।
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कई अस्पतालों से लौट चुकी थी मरीज
मरीज के परिजनों के अनुसार, उन्होंने लखनऊ के कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन जोखिम अधिक होने के कारण किसी ने ऑपरेशन करने की हिम्मत नहीं दिखाई। बाद में गोमतीनगर के एक डॉक्टर की सलाह पर आशीर्वाद सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में दिखाया गया, जहां सर्जरी का निर्णय लिया गया। महिला के पेट से निकाली गई गांठ को जांच के लिए लैब भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की चिकित्सा प्रक्रिया तय की जाएगी।
आयुष्मान योजना बनी गरीब परिवार के लिए सहारा
मरीज के परिजनों ने केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना की सराहना करते हुए कहा कि इस योजना की वजह से ही इलाज संभव हो सका। उन्होंने बताया कि अस्पताल ने योजना के तहत पूरा सहयोग दिया और अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया, बल्कि कई सुविधाएं अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराई गईं। परिजनों ने सर्जन डॉ. मनोज श्रीवास्तव, हॉस्पिटल डायरेक्टर डॉ. रवि श्रीवास्तव और पूरे स्टाफ के सहयोगी व्यवहार की प्रशंसा की।
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“रिस्क लिए बिना सफल नहीं होती सर्जरी”
डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि मेडिकल क्षेत्र में बिना जोखिम लिए बड़ी सर्जरी संभव नहीं होती। मरीज के परिजनों की लिखित सहमति और अस्पताल प्रबंधन के समर्थन से ऑपरेशन किया गया और सफलता मिली। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के समय में अस्पतालों में तोड़फोड़ और अनावश्यक हस्तक्षेप की घटनाओं के कारण कई डॉक्टर जोखिम लेने से बचने लगे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि डॉक्टर अपने मरीज को परिवार की तरह मानते हैं और उसकी जान बचाना ही उनकी प्राथमिकता होती है।
