उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से धर्मांतरण को लेकर एक मामला सामने आया है। पुलिस ने पांच मुस्लिम छात्राओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 के तहत एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई एक छात्रा के भाई की शिकायत के आधार पर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उसकी बहन पर धर्म बदलने का दबाव बनाया गया।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता देवेश चौधरी ने बिलारी थाना में दर्ज कराई गई शिकायत में बताया कि उसकी बहन कुछ छात्राओं के साथ एक ही ट्यूशन क्लास में पढ़ती थी। आरोप है कि इन छात्राओं ने कथित तौर पर पीड़िता को बुर्का पहनने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित और दबाव में लेने की कोशिश की।
इस मामले में उत्तर प्रदेश धर्म के गैरकानूनी रूपांतरण निषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत केस दर्ज किया गया है। कानून के तहत जबरन, धोखे या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन कराने पर कड़ी सजा का प्रावधान है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर 5 से 14 साल तक की कैद हो सकती है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। अब तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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इसी बीच, समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने दिल्ली में हाल ही में हुए अतिक्रमण विरोधी अभियान को लेकर प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दिल्ली नगर निगम द्वारा फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास चलाए गए अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से अल्पसंख्यक समुदाय में असंतोष पैदा होता है।
एसटी हसन ने एएनआई से बातचीत में कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी कार्रवाई लोगों की भावनाओं को आहत करती है और इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष रवैया अपनाने और हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह अतिक्रमण विरोधी अभियान हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत किया गया था और शांति बनाए रखने के लिए पहले से स्थानीय लोगों और अमन कमेटी के साथ बैठकें की गई थीं।
