पटना। बिहार के रोहतास जिले में निर्माणाधीन 13 करोड़ रुपये की रोपवे परियोजना के ट्रायल के दौरान धराशाई होने की घटना को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। बिहार के पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में दोषी पाए गए विभागीय इंजीनियरों को निलंबित करने और निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मंत्री दिलीप जायसवाल ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि रोपवे ट्रायल के दौरान टूटना सीधे तौर पर तकनीकी चूक और मानवीय लापरवाही का परिणाम है। घटना के तुरंत बाद सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट में संवेदक यानी निर्माण कंपनी के साथ-साथ पथ निर्माण विभाग के इंजीनियरों की गंभीर लापरवाही सामने आई है।
जांच में क्या निकला सामने
जांच रिपोर्ट के अनुसार, रोपवे ट्रायल के समय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। तकनीकी डिजाइन में भी खामियां पाई गई हैं, जिसके कारण पिलर भार सहन नहीं कर सका। मंत्री ने बताया कि जिस डिजाइन के आधार पर रोपवे बनाया जा रहा था, उसकी भी अलग से जांच कराई जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
इंजीनियर सस्पेंड, कंपनी ब्लैकलिस्ट
सरकार ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए परियोजना से जुड़े प्रोजेक्ट इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही जिस निर्माण कंपनी को रोपवे का ठेका दिया गया था, उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। मंत्री ने कहा कि सरकारी पैसों और लोगों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि रोहतास प्रखंड मुख्यालय से ऐतिहासिक चौरासन मंदिर तक बनने वाले इस रोपवे का ट्रायल चल रहा था। इसी दौरान अचानक रोपवे का पिलर और ट्रॉली नीचे गिर गए। ट्रायल के समय पिलर निर्धारित भार को संभाल नहीं पाया, जिससे पूरी संरचना धराशाई हो गई।
इस घटना में राहत की बात यह रही कि ट्रॉली में उस समय कोई व्यक्ति सवार नहीं था। यदि ट्रायल के दौरान कोई मौजूद होता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस रोपवे को नए साल में पर्यटकों के लिए खोलने की योजना थी, ताकि दुर्गम पहाड़ी रास्ते को आसान बनाया जा सके।
