लखनऊ | मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में सोमवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब बरेली-पिपरिया स्टेट हाइवे-19 पर नयागांव के पास करीब 50 साल पुराना पुल अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में दो मोटरसाइकिल सवार समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को तुरंत भोपाल रेफर कर दिया गया है। गनीमत रही कि पुल के नीचे मरम्मत का काम कर रहे छह मजदूर किसी तरह जान बचा कर भाग निकले, वरना हादसा और भयावह हो सकता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि पुल का करीब 45-50 फीट हिस्सा पूरी तरह ध्वस्त हो गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले आठ दिनों से पुल के नीचे मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) की टीम मरम्मत का काम कर रही थी, लेकिन ऊपर से भारी वाहनों का आवागमन बंद नहीं किया गया था। ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। उनका कहना है, “जब पुल कमजोर था और नीचे काम चल रहा था, तो ऊपर से ट्रक-बस क्यों चलने दिए जा रहे थे? क्या MPRDC बड़े हादसे का इंतजार कर रही थी?”
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि न तो मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण दिए गए थे और न ही वैकल्पिक रास्ते का इंतजाम किया गया। अगर पुल का पूरा हिस्सा गिरता तो दर्जनों जिंदगियां जा सकती थीं। घटना के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय विधायक और अधिकारियों को लोगों ने खासी खरी-खोटी सुनाई। हादसे की सूचना मिलते ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने MPRDC के इंजीनियरों को फटकार लगाते हुए तत्काल सभी पुराने पुलों की जांच के आदेश दिए। मंत्री ने कहा, “राज्य के हर जिले में 40 साल से पुराने पुलों की लिस्ट तैयार की जाए। उनकी भार वहन क्षमता की जांच हो और जरूरी मरम्मत या पुनर्निर्माण तुरंत शुरू किया जाए। ऐसे हादसों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
इस घटना ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में जर्जर पुलों और सड़कों की बदहाली को उजागर कर दिया है। विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि रखरखाव के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति होती है। अब देखना यह है कि मंत्री के आदेश के बाद कितने पुराने पुलों को वाकई सुरक्षित किया जाता है या यह सिर्फ एक और औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
