झारखंड में SIR का धमाका : डेमोग्राफी बदलेगी या लोकतंत्र?                                  

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  • सर्दी शुरू होते ही सियासी तापमान बढ़ा                         
  • फरवरी से शुरू होगी समरी रिवीजन प्रक्रिया   

रंजन कुमार सिंह                  

झारखंड की राजनीति में सर्दी की शुरुआत होते ही सियासी तापमान बढ़ गया है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने जैसे ही Special Intensive Revision (SIR) की तारीखें तय करने का संकेत दिया, वैसे ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बयान बाज़ार में हॉट सेल शुरू हो गई। BJP ने घोषणा की कि अब वोटर लिस्ट की सफाई होगी, अवैध मतदाताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। JMM-कांग्रेस गठबंधन का कहना है कि ये सफाई नहीं, राजनीतिक सफ़ाया है। अब जनता सोच रही है कि जब भी सफाई शब्द आता है, नेता खुद को सैनिटाइज़र समझने लगते हैं और जनता को वायरस। चुनाव आयोग कह रहा है कि मृत, पलायन कर चुके और फर्जी मतदाताओं को सूची से हटाना जरूरी है। लेकिन नेता लोग इसे लोकतंत्र की हत्या बताने में जुटे हैं। सवाल ये नहीं कि कौन वैध है, सवाल ये है कि किसके पास वैध वोट बैंक है। संथाल परगना में तो मामला ज्यादा दिलचस्प है। वहां लोग डर के साथ हास्य में पूछ रहे हैं कि कहीं ऐसा ना हो कि कल मतदान के दिन पता चले कि वोट देने गए थे, लेकिन लिस्ट में नाम बंगाल चला गया!

SIR प्रक्रिया की समीक्षा करते मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रविकुमार
SIR प्रक्रिया की समीक्षा करते मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रविकुमार

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस S.I.R. से खास परेशानी है। विधानसभा में उन्होंने प्रस्ताव लाकर कहा कि ये दलितों, अल्पसंख्यकों और गरीबों का अधिकार छीनने की साजिश है। विपक्ष के बाबूलाल मरांडी का कहना है अरे भाई, जब मतदाता ही असली नहीं हैं तो लोकतंत्र किसके नाम पर चलेगा? अब जनता समझ नहीं पा रही कि लोकतंत्र बचाने की चिंता किसे ज्यादा है उसे जो सरकार में है, या उसे जो कुर्सी में आना चाहता है। झारखंड के हर जिले में अब बीएलओ से लेकर ईआरओ तक मतदाता खोज अभियान चलाने को तैयार हैं। कुछ जगहों पर बीएलओ को डर है कि नाम काटने से पहले ही नेताजी उन्हें लिस्ट से बाहर कर देंगे। वहीं कई ग्रामीण इलाकों में लोग सोच रहे हैं अगर जन्म प्रमाण पत्र से ही पहचान तय होगी, तो जिन्होंने वोट डालने के लिए जन्म नहीं लिया था, वो क्या करेंगे?

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संपूर्ण बिहार में पहले SIR के दौरान 35 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम कटने की खबर थी। अब झारखंड में भी विपक्ष को डर है कि नाम कटेंगे और वोटर गिनती घटेगी। लेकिन जनता जानती है जब भी किसी नाम पर खतरा होता है, वही नाम अगले चुनाव में  भावनात्मक पूंजी बन जाता है। चंपाई सोरेन और बाबूलाल मरांडी दोनों कह रहे हैं कि डेमोग्राफी बदली है इसलिए कार्रवाई बहुत जरूरी है। जनता कह रही है ठीक है, पहले नेताजी की भी डेमोग्राफी देखिए  पांच साल में किस दल से किस दल में घुसे हैं! सियासत का आलम यह है कि अब SIR सिर्फ मतदाता सूची का सुधार नहीं, बल्कि पार्टियों की सियासी रिपेयरिंग का मौका बन गया है। हर पार्टी चाहती है कि सूची में नाम वही रहे, जो वोट देने से पहले उनका नाम ले।

 फरवरी से शुरू होगी समरी रिवीजन की प्रक्रिया

इधर झारखंड में फरवरी महीने से स्पेशल समरी रिवीजन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसके तहत राज्य के मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन किया जाएगा। चुनाव आयोग ने इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी है और 2003 की मतदाता सूची को आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया है। मतदाताओं से अपील की गई है कि वे 2003 की वोटर लिस्ट में अपना नाम मिलाएं और वर्तमान मतदाता सूची से क्रॉस वेरिफाई कर लें। आयोग का उद्देश्य है कि फरवरी में होने वाले एसआआर से पहले प्रत्येक सही मतदाता का नाम का मिलान हो जाए। इस कार्य के लिए सभी बूथों पर बूथ लेवल ऑफिसर को तैनात किया गया है।  झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा है कि राज्य में वर्तमान मतदाता सूची के मतदाताओं का 2003 के मतदाता सूची से पैतृक मैपिंग का कार्य प्रगति पर है। इसे प्रमुखता में रखते हुए यथा शीघ्र पूरा करना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि कुछ विधानसभा क्षेत्र में मतदात सूची की पैतृक मैपिंग के कार्य 70 प्रतिशत तक पूरी कर ली गई है इन क्षेत्र के मतदाताओं का मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के क्रम में इन्यूम्यूरेशन फॉर्म भरने में अधिक सुगमता हो सकेगी।

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वोटर आउटरीच प्रोग्राम चलाने का निर्देश

वहीं जिन विधानसभा क्षेत्र के मतदाता सूची की पैतृक मैपिंग अभी भी कम है वे इस कार्य में तीव्रता लाने के लिए वोटर आउटरीच प्रोग्राम चलाएं और पैतृक मैपिंग में तेजी लाएं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मंगलवार को निर्वाचन सदन से सभी जिलों के ईआरओ एवं उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे।

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मैपिंग का कार्य ससमय पूरा करने का निर्देश

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि मैपिंग के कार्य में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। इसे ससमय पूरा करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इसके साथ साथ राजनीतिक दलों के साथ बैठक करते हुए उनके द्वारा बीएलए के नियुक्ति में तेजी लाने के लिए आग्रह करें। जिससे भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य में आगामी मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम में और अधिक निष्पक्षता आ सके।

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