- यूट्यूबर सोहेल अहमद सहित 8 पर नामज़द FIR,
- जांच के लिए SIT गठित,
- मृतकों के परिजनों से मिलने आए स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के भीड़ में रिपोर्टर्स पर हमला,
- पत्रकारों ने दर्ज कराई प्राथमिकी,
नया लुक ब्यूरो
रांची/हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पौता गांव में तीन भाई-बहनों (दो बहनें और एक भाई) की हत्या का मामला 27 अप्रैल 2026 में सामने आया, जिसने इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यह गंभीर आपराधिक घटना हत्या (triple murder) और संभवतः अपहरण (abduction) से जुड़ी है। मृतकों में वशिफा नाज उर्फ खुशी (19-21 वर्ष), सानिया परवीन (19 वर्ष) और मो. आदिल हुसैन (25-27 वर्ष) शामिल हैं। ये तीनों आपस में मौसेरे-ममेरे भाई-बहन थे। तीनों 23 अप्रैल 2026 को पौता गांव से लापता हुए थे। उनके शव 27 अप्रैल 2026 की शाम को पौता-डेमोटांड़ जंगल के पास कोनार नदी (दंदाहा नदी) से बरामद किए गए। परिजनों का आरोप है कि यह एक सोची-समझी साजिश है। वशिफा नाज (खुशी) की शादी 19 मई को होने वाली थी, जिसके लिए आदिल और सानिया घर आए हुए थे। बताया जा रहा है कि तीनों 23 अप्रैल को बगीचे में आम तोड़ने के लिए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे।FIR में एक स्थानीय यूट्यूबर सोहेल अहमद, इशरत बानो, और फराना परवीन सहित 8 लोगों को नामजद किया गया है।
आरोप है कि परिजनों से 50,000 रुपये की फिरौती मांगी गई थी और मांग न पूरी होने पर हत्या की धमकी दी गई थी। शवों की हालत और शुरुआती फोरेंसिक संकेत हत्या की ओर इशारा करते हैं, क्योंकि पोस्टमार्टम में पेट में पानी नहीं पाया गया, जिससे अंदेशा है कि हत्या पहले की गई और शव बाद में नदी में फेंके गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक ने SIT (Special Investigation Team) का गठन किया है। पुलिस हर पहलू, जैसे अपहरण, रंजिश, और जबरन शादी के प्रस्ताव (disputed marriage proposal) की जांच कर रही है। परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है कि यदि समय पर कार्रवाई की जाती, तो तीनों की जान बच सकती थी। इधर झारखंड के बड़बोले स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी जब शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पीड़ित परिवार से मिलकर बाहर आए, तब मीडियाकर्मी वहां मौजूद थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जब पत्रकारों ने ट्रिपल मर्डर की जांच, एयर एम्बुलेंस हादसे और मृतकों के परिजनों को मुआवजा जैसे तीखे सवाल पूछे, तो मंत्री के समर्थक भड़क गए। कहा जा रहा है कि सवालों से असहज होकर मंत्री के समर्थकों ने मीडियाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि परिजनों ने भी पत्रकारों पर नाराजगी जताई थी, जिसे बाद में समर्थकों ने हिंसा का रूप दे दिया।
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इस घटना में कुछ पत्रकार घायल हुए और पत्रकारों ने सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। मौके पर मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप किया। इरफान अंसारी ने सफाई देते हुए कहा कि वह वहां पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने गए थे और उस समय परिवार की मानसिक स्थिति खराब थी। उन्होंने पत्रकारों से मारपीट में खुद के शामिल होने से इनकार किया और कहा कि उनके समर्थकों को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। उन्होंने पत्रकारों को लेकर भी टिप्पणी की कि वह मीडिया का सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ लोग बीजेपी एजेंट की तरह काम करते हैं। इस घटना के बाद, बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने हमला करने का आरोप मंत्री के समर्थकों पर लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। हजारीबाग प्रेस क्लब ने भी इस घटना की निंदा की और दोषियों के खिलाफ सदर थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
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