सरकार वोडाफोन आइडिया के सभी AGR बकाये पर कर सकती है पुनर्विचार : उच्चतम न्यायालय

Supreme court NayaLook

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया को बड़ी राहत देते हुए कहा कि सरकार कंपनी के समायोजित सकल राजस्व (AGR) से जुड़े सभी बकाया पर पुनर्विचार कर सकती है और राहत केवल वित्त वर्ष 2016-17 के अतिरिक्त AGR बकाये तक ही सीमित नहीं होगी। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 27 अक्टूबर के अपने आदेश में हुई त्रुटि को स्पष्ट करते हुए कहा कि वोडाफोन आइडिया ने अपनी अपील में केवल अतिरिक्त AGR की देनदारी नहीं, बल्कि सभी AGR बकायों के पुनर्मूल्यांकन की भी मांग की थी। वोडाफोन आइडिया के वकील ने शीर्ष अदालत से कहा कि पिछले आदेश के छठे पैरा में त्रुटि हुई है, जिसमें कहा गया था कि कंपनी ने केवल अतिरिक्त AGR देनदारी के लिए राहत मांगी है।

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इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वोडाफोन आइडिया की याचिका में राहत का दायरा सभी बकाया देनदारी को शामिल करता है। न्यायालय के इस स्पष्टीकरण से अब केंद्र सरकार को वोडाफोन आइडिया के सभी AGR बकायों पर पुनर्मिलान और राहत देने का रास्ता मिल गया है। कर्ज के बोझ से डूबी कंपनी पर अतिरिक्त AGR बकाया लगभग 9,450 करोड़ रुपये का है जबकि दूरसंचार विभाग की उससे कुल AGR मांग मार्च, 2025 तक 83,500 करोड़ रुपये की है। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि दूरसंचार कंपनी में सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होने और 20 करोड़ ग्राहकों के हितों को देखते हुए सरकार कंपनी के मुद्दों पर दोबारा विचार करने को तैयार है।

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मुख्य न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि केंद्र सरकार ने इस कंपनी में महत्वपूर्ण इक्विटी निवेश किया है और यह लाखों उपभोक्ताओं को प्रभावित करता है। इस लिए, हम सरकार को पुनर्विचार करने और जरूरी कदम उठाने से नहीं रोक सकते हैं। AGR के आधार पर दूरसंचार कंपनियां सरकार को लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम शुल्क का भुगतान करती हैं। इस पर विवाद 2000 के दशक से ही चलता आ रहा है कि AGR में गैर-दूरसंचार आय को भी शामिल किया जाए या नहीं।  उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2019  में AGR की परिभाषा को व्यापक रखते हुए सरकार के पक्ष में फैसला दिया था जिसके बाद वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल सहित कई दूरसंचार कंपनियों पर भारी बकाया देनदारी आ गई थी।

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