- दुस्साहस: बहला-फुसलाकर खाते से पार किए तीन लाख की नकदी
- मोबाइल व एटीएम लेकर भाग निकले बदमाश
- पीड़ित की जुबानी, मुकदमा दर्ज करने में नाका पुलिस घंटों लगवाया चक्कर, गिड़गिड़ाने पर दर्ज की रिपोर्ट
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। बदमाशों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे अब आर्मी जवानों को निशाना बना रहे हैं। असम राज्य में तैनात इंडियन आर्मी के जवान कानपुर नगर निवासी अमोल पुत्र नारायण छुट्टी पर ट्रेन के जरिए घर लौट रहे थे कि जैसे ही वह चारबाग रेलवे स्टेशन पर उतरे कि दो अनजान व्यक्ति उनसे पटना जाने वाली ट्रेन के बारे में पूछा। अमोल को अपने घेरे में लेते हुए दोनों अनजान शख्स साथ-साथ चल दिए। अमोल नाका हिंडोला थाना क्षेत्र स्थित कोटक एटीएम बूथ पर एकाउंट चेक करने लगे कि बदमाशों ने कोड नंबर झांसे में लेकर उनका एटीएम और मोबाइल फोन लेकर फुर्र हो गए।

आर्मी जवान अमोल को उस समय एहसास हुआ जब उनके बैंक खाते से दो लाख 80 हजार निकल गए। यह माजरा देख अमोल पहले जीआरपी थाने गया तो वहां की पुलिस ने यह कहकर टरका दिया कि मामला नाका हिंडोला क्षेत्र का है। बेबस जवान उम्मीद लेकर नाकाम कोतवाली की दहलीज पर कदम रखा और प्रार्थना पत्र वहां पर तैनात पुलिसकर्मियों को थमाया तो कुछ देर बाद ही नाका पुलिस भी टरकाने की कोशिश की और घंटों इंडियन आर्मी जवान को बैठाया गया। पुलिस की रवैया देख अमोल यह कहते हुए उठकर जाने लगा कि अब बड़े अफसरों के पास ही जाना होगा। लिहाजा काफी जद्दोजहद के बाद नाका हिंडोला पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली, लेकिन बदमाशों का पता लगाने के बजाए हाथ पर हाथ धरे बैठे गई। पुलिस ने यह व्यवहार किसी आम आदमी के साथ नहीं बल्कि देश की रक्षा के लिए लड़ने वाले जवान के साथ किया।
पूरे घटनाक्रम पर एक नजर
कानपुर नगर जिले के सचैडी थाना क्षेत्र स्थित मंगदपुर निवासी अमोल पुत्र नारायण असम राज्य की सीमा पर इंडियन आर्मी में तैनात हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो में उन्होंने बताया कि वह छुट्टी लेकर ट्रेन के जरिए वापस घर लौट रहे थे कि जैसे ही चारबाग रेलवे स्टेशन पर उतरे तो उनसे दो अनजान व्यक्ति पटना जाने वाली ट्रेन के बारे में पूछा। अमोल यह कहते हुए आगे बढ़े कि अनजान व्यक्ति भी उनके साथ हो लिए और दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए पूरी तरह से झांसे में लेने के बाद दोनों अनजान व्यक्तियों ने उनका मोबाइल फोन व ATM कार्ड लेकर भाग निकले। अमोल को उस समय एहसास हुआ जब उसके बैंक खाते से दो लाख 80 हजार रुपए निकल गए।
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आर्मी जवान रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए गिड़गिड़ाता और नाका पुलिस बनी रही अनजान
इंडियन आर्मी जवान अमोल के साथ हुई घटना के बाद इंस्पेक्टर नाका हिंडोला और उनके मातहत इस कदर लापरवाह बरतते नजर आए की ऐसा लग रहा है पुलिस महानिदेशक और पुलिस कमिश्नर का फरमान उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। आर्मी जवान अमोल को घंटों थाने की दहलीज पर बैठाए रखा। अमोल पुलिस की रवैया देख अफसरों तक पहुंचने की बात की तब जाकर नाका हिंडोला पुलिस नींद से जागी और काफी जद्दोजहद के बाद पीड़ित आर्मी जवान अमोल की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया।
