बिजनौर और लखनऊ जेल की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की खोली पोल

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  • प्रशासनिक व्यवस्था छोड़ वसूली में जुटे AIG जेल प्रशासन!
  • AIG जेल प्रशासन के कार्यकाल में हुई खरीद-फरोख्त के जांच की उठी मांग

लखनऊ। प्रदेश के कारागार मुख्यालय में तैनात अपर महानिरीक्षक कारागार (एआईजी प्रशासन) अपना मूल काम छोड़कर वसूली के काम में जुट हुए है। यह बात सुनने और पढ़ने में भले ही अटपटी लगे लेकिन यह सच एआईजी कारागार प्रशासन की कार्यप्रणाली में आसानी से देखा जा सकता है। हाल ही में उन्होंने मोटी रकम की मांग पूरी नहीं करने वाले एक बाबू को हटाकर इसके स्थान पर दूसरे बाबू को तैनात कर दिया गया। यही नहीं उन्होंने मोटा कमिशन प्राप्त करने के लिए पिछले करीब 15-20 साल से विभाग में सामनों की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों को हटाकर नए ठेकेदारों को लगाकर अपनी वसूली में जबरदस्त बढ़ोत्तरी कर ली है। यह मामला मुख्यालय के अधिकारियों और कर्मियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि इनके कार्यकाल के दौरान ही खरीद फरोख्त की निष्पक्ष जांच करा दी जाए तो दूध का दूध पानी सामने आ जाएगा। उधर इस बेतहाशा वसूली के संबंध में कारागार मंत्री समेत अन्य आला अफसरों ने चुप्पी साध रखी है।

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मिली जानकारी के मुताबिक जून 2024 में शासन ने प्रोन्नत आईएएस धर्मेंद्र सिंह को कारागार मुख्यालय में अपर महानिरीक्षक कारागार (प्रशासन) के पद पर तैनात किया था। सूत्रों का कहना है शासन में सेटिंग गेटिंग करके नियम विरुद्ध तरीके से जुगाड़ के बल पर इनकी तैनाती कराई गई। नियमानुसार एआईजी कारागार प्रशासन के पद पर सीनियर पीसीएस की तैनाती होती रही है। सूत्रों की माने तो जो अधिकारी इस पद पर एक बार आ जाता है तो वह फिर जाने का नाम नहीं लेता है। मोटी कमाई होने की वजह से कोई भी अधिकारी इस पद को आसानी से छोड़ने को तैयार ही नहीं होता है।

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सूत्रों का कहना है कि बीते स्थानांतरण सत्र में एआईजी कारागार प्रशासन ने नए डीजी जेल को गुमराह करके सैकड़ों की संख्या में जेल अधिकारियों और कर्मियों के तबादले किए। इन तबादलों में अधिकारियों से मोटी रकम लेकर उन्हें उनके मनमाफिक कमाऊ जेलों पर तैनात कर दिया। अवैध वसूली के चलते एक-एक जेलर के तीन- तीन बार तबादले बदल दिए। तबादलों के बाद अब एआईजी जेल प्रशासन ने जेलों के प्रशासनिक व्यवस्था को दर किनार कर आधुनिक उपकरण, उद्योग के रॉ मैटेरियल की खरीद फरोख्त कर मोटा कमिशन वसूलने में जुट हुए हैं।

सूत्रों का कहना है कि बीते दिनों एआईजी प्रशासन ने एक बाबू से मोटा कमिशन दिए जाने की मांग की। मांग पूरी नहीं करने पर इस बाबू को हटाकर उसके स्थान पर दूसरे को लगा दिया। नए बाबू से कमिशन की मोटी डील की गई है। यही नहीं कर मोटा कमिशन हासिल करने के लिए विभाग में पिछले 15-20 साल से काम कर रहे कई ठेकेदारों को हटाकर उनके स्थान पर लगाए ठेकेदारों से एक के बजाए दो से तीन प्रतिशत अधिक कमिशन वसूल कर रहे है। एआईजी की वसूली का यह मामला मुख्यालय के अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कर्मचारियों की मांग है कि इनके कार्यकाल में हुई खरीद फरोख्त की जांच कर ली जाए तो बड़ा घोटाला खुद ही सामने आ जाएगा। उधर इस संबंध में जब कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान, प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।

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मुख्यालय के समस्त कमाऊ प्रभार एआईजी के पास!

कारागार मुख्यालय में एआईजी प्रशासन का महत्वपूर्ण पद है। जिसमें मोटा कमिशन और अवैध वसूली की पूरी व्यवस्थाएं है। सूत्रों के मुताबिक वर्तमान समय में एआईजी प्रशासन के पास गोपनीय (जेलर से लेकर डीआईजी तक की विभागीय कार्यवाही, तबादले इत्यादि), अधिष्ठान एक (डिप्टी जेलर, हेड वार्डर और वार्डर के तबादले और विभागीय कार्यवाही), अधिष्ठान दो (फार्मासिस्ट, मुख्यालय और जेलों के बाबुओं के तबादले), आधुनिकीकरण (जेलों के लिए आधुनिक उपकरणों की खरीद फरोख्त), उद्योग (जेलों में संचालित उद्योगों के रा मटेरियल की खरीद फरोख्त) के अलावा कई अन्य ऐसे प्रभार है जिनमें मोटा कमिशन और कमाई के तमाम स्रोत है। मुख्यालय में एआईजी कारागार प्रशासन होने से उनका प्रदेश के सभी जनपदों से वसूली का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

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