वंचित वर्ग के साथ सरकार

डॉ दिलीप अग्निहोत्री


कोरोना आपदा के दौरान अनेक बच्चों ने अपने माता पिता को खो दिया था। योगी आदित्यनाथ संवेदनशील हैं। उन्होंने ऐसे सभी बच्चों पर ध्यान दिया। कहा कि सरकार उनके साथ है। योगी आदित्यनाथ ने उन बच्चों के पालन-पोषण शिक्षा के लिए योजना लागू की। ऐसा करने वाले वह देश के पहले मुख्यमंत्री थे। उनसे प्रेरणा लेकर अन्य प्रदेशों ने भी ऐसी योजना बनाई थी। अनाथ हुए बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे थे। उन बच्चों को ‘उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सहायता योजना’ से जोड़ा गया। लेकिन कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से जिन बच्चों के माता-पिता अभिभावकों की मृत्यु कोरोना काल खण्ड के समय या उसके बाद हुई, उन बच्चों के कल्याण के लिए प्रदेश सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सामान्य प्रारम्भ की। अनाथ हुए बच्चों के भरण-पोषण के लिए इस योजना के अन्तर्गत अठारह वर्ष की आयु तक पच्चीस सौ रुपये प्रतिमाह की दर से उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। जिसे समय-समय पर महंगाई के अनुपात में बढ़ाया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ ऐसे अनाथ बच्चों से स्वय मिलते थे। वात्सल्य भाव से उनके सिर पर हांथ फेरते थे। उन्हें विश्वास दिलाते थे। कहते थे मैं तुम्हारे साथ हुँ। वह बहुत भावुकता के क्षण हुआ करते थे। ऐसे ही पल मुख्यमंत्री के सरकारी आवास में दिखाई दिए। योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सामान्य’ व ‘स्माइल परियोजना’ के अंतर्गत भिक्षावृत्ति से मुक्त कराये गये इन बच्चों को स्कूल बैग, यूनीफॉर्म, बुक्स इत्यादि प्रदान किए। बच्चों से संवाद किया। इन बच्चों का बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में एडमिशन कराया गया है। वर्तमान सरकार विगत छह वर्षों से परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को स्कूल बैग, यूनीफॉर्म, बुक्स इत्यादि उपलब्ध करा रही है। राज्य सरकार वर्तमान में प्रदेश के करीब दो करोड बच्चों को यह सुविधा प्रदान कर रही है।

योगी आदित्यनाथ ने भिक्षाटन की भारतीय परम्परा का उल्लेख किया। कहा कि सन्यासियों द्वारा दिन में एक बार किसी एक परिवार से भिक्षाटन लिया जाता था। भिक्षाटन का उद्देश्य व्यक्तिगत अहंकार को त्याग कर समाज दर्शन द्वारा समाज को जानने और समझने का था। लेकिन जब यह कार्य वृत्ति व व्यवसाय के साथ जुड़ गया, तो इसका खतरनाक रूप हमें देखने को मिलता है। जिन बच्चों के पास स्कूल जाने का अवसर व उनके सुनहरे भविष्य के लिए सरकार की अनेक योजनाएं हैं, उन बच्चों को गिरोह द्वारा जबरन भिक्षावृत्ति में संलिप्त कर दिया जाता है। सरकार द्वारा समय-समय पर ऐसे बहुत सारे गिरोहों पर सख्त कार्रवाई की गयी है।

भिक्षा को वृत्ति के रूप में लेने वाले गिरोहों का पर्दाफाश करने और इससे प्रभावित परिवारों का पुनर्वास करने के लिए ‘स्माइल परियोजना’ संचालित की जा रही है। आंगनबाड़ी केन्द्रों के साथ तीन से पांच वर्ष की आयु के बच्चों को जोड़ा जाए तथा पोषण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रदेश सरकार सभी मण्डलों में अटल आवासीय विद्यालय बना रही है। इसी सत्र से यह विद्यालय प्रारम्भ हो जाएंगे। अटल आवासीय विद्यालयों में पंजीकृत श्रमिकों के बच्चे व अनाथ बच्चे पढ़ेंगे। इन विद्यालयों में यह बच्चे कक्षा एक से बारह तक की निःशुल्क व आवासीय शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। आने वाले समय में प्रदेश सरकार प्रत्येक जनपद में एक अटल आवासीय विद्यालय, तदुपरान्त प्रत्येक विकास खण्ड में एक अटल आवासीय विद्यालय की स्थापना की जाएगी।

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