कविता : वादा दिवस, पतिदेव की कहानी

कर्नल आदि शंकर मिश्र
कर्नल आदि शंकर मिश्र

वादा करो कि बेलन का उपयोग
चपाती बनाने के लिये ही करोगी,
वादा दिवस, पति देव की कहानी
सुनिये कहानी उन्हीं की ज़ुबानी।

प्रेम विवाह और उनकी ज़िंदगी,
घर से भाग कोर्ट में कर ली शादी,
कुछ दिन मौजें, फिर शुरू झगड़े,
प्रेम भूत उतरा और बोल बिगड़े।

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वैलेंटाइन डे से शुरू प्रेम की पैंगें,
रोज़ डे, प्रपोज़ डे, चाकलेट डे,
टेडी डे, प्रोमिज डे, हग डे, किस डे,
वैलेंटाइन डे और बस फिर बेलन डे।

पाश्चात्य संस्कृति पाश्चात्य ढंग,
कोर्ट में शादी, कोर्ट में शादी भंग,
जब जवानी में कदम डगमगाया,
बिगड़ी जवानी, बिगड़ गया बुढ़ापा।

कविता: विश्वास खोना बहुत आसान होता है,

बिज़नेस शादी, शादी बिज़नेस,
टूट गया एग्रीमेंट, बिज़नेस ख़त्म,
बिज़नेस ख़त्म तो शादी भी ख़त्म,
जीवन में यूँ होता सब कुछ ख़त्म।

इसमें उलझे उलझे युवा वृद्ध सब
पुलवामा बलिदानी सैनिक जज़्बा,
भूल गये आज का शहीद दिवस,
आदित्य वैलेंटाइन याद विवश।

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