कहीं यह यात्रा रोकने की तैयारी तो नहीं…

डॉ. ओपी मिश्र


कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रही ‘भारत जोड़ो यात्रा’ इस समय हरियाणा में चल रही है। हरियाणा से निकलकर यह यात्रा भारत की राजनीति का केंद्र बिंदु नई दिल्ली में प्रवेश करेगी। नई दिल्ली यानी न केवल सत्ता का केंद्र बिंदु बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का जमावड़ा भी यही रहेगा। इतना ही नहीं तमाम देशों के राजदूत भी राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से रूबरू होंगे जो अभी तक इसको विश्व पटल पर कोई बहुत अधिक महत्व नहीं दे रहे थे । लेकिन अब ‘विज्यूल’ को नकार पाना शायद किसी के लिए भी आसान नहीं होगा और यही वह प्रमुख चिंता है जिसके कारण भाजपा हाईकमान के माथे पर सिलवटें साफ देखी जा सकती हैं।

विपक्ष के जो भी छत्रप भाजपा की हां हां मिलाते हुए ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की बात कर रहे थे उन्हें भी यात्रा की सफलता ने एक बार पुनः यह सोचने को मजबूर कर दिया है। कि अगर मोदी और भाजपा से दो-दो हाथ करने है तो कांग्रेस को मिला कर या कांग्रेस के साथ मिलकर ही किया जा सकता है । कन्याकुमारी से चल रही भारत जोड़ो यात्रा अब जब दिल्ली में प्रवेश करने वाली है तो केंद्र सरकार के चेहरे की हवाइयां इसलिए उड़ रही है क्योंकि यह यात्रा अपने मकसद में कामयाब होते दिख रही है। राहुल गांधी जिस तरह महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, सत्ता का दुरुपयोग, भय के वातावरण का निर्माण, सांप्रदायिक सौहार्द आदि जन सरोकार से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं । उससे आम आदमी अपने को सीधे-सीधे जोड़ता देख रहा है। शायद यही वह वजह है जो भाजपा को संघ को और केंद्र सरकार को असहज महसूस करा रहा है। इतिहास गवाह है कि जब जब किसी बड़ी यात्रा ने दिल्ली में पड़ाव डाला है तब-तब इतिहास ने ना केवल करवट ली है बल्कि भूगोल को भी प्रभावित किया है।

शायद यही वह प्रमुख कारण है जिसके चलते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मांडवीया ने कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में कोविड गाइडलाइंस की सख्ती से पालन करने की बात कही है। स्वास्थ्य मंत्री ने राहुल गांधी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर कहा है कि अगर यात्रा में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना संभव नहीं है तो यात्रा को रोकने के बारे में सोचें । मतलब साफ है कि केंद्र सरकार किसी भी कीमत पर यह नहीं चाहती की यात्रा का एक छोर लाल किले पर हो तो दूसरा छोर संसद पर हो क्योंकि इससे राहुल गांधी को उन अखबारों और उन चैनलों में भी पर्याप्त स्पेस मिलेगा जो अब तक उनको इग्नोर कर रहे थे। क्योंकि विदेशी चैनलों और अखबारों के अधिकांश रिपोर्टर दिल्ली में रहते हैं। मतलब साफ है कि केंद्र सरकार किसी भी हालत में राहुल गांधी को अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर खड़े होना नहीं देखना चाहती। और उसके लिए वह कोई भी हथकंडा इस्तेमाल कर सकती है।

जैसे उसने कोविड गाइडलाइंस का सहारा लिया। स्वास्थ्य मंत्री मांडवीया के पत्र के जवाब में कांग्रेस महासचिव जयराम नरेश ने कहा है कि सरकार कोविड नियमों की घोषणा करें, हम पालन करेंगे लेकिन कोविड की आड़ में भारत जोड़ो यात्रा को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। बताते चले कि कोविड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सिरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अहार पूनावाला का कहना है कि भारत को बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन के कारण घबराने की कोई जरूरत नहीं । इसी तरह की बात आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने करते हुए कहा है कि देश की 98 % आबादी में कोविड के खिलाफ नेचुरल एंटीबॉडी बन गई है इसलिए लोगों को डरने की जरूरत नहीं।

वैसे चीन, जापान , दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देशों में कोविड के बढ़ते मामले देखते हुए भारत सरकार यदि सतर्क हुई है तो उसकी नीयत पर संदेह करने का कोई कारण ही नहीं क्योंकि जान है तो जहान है। लेकिन ‘देशहित’ और ‘राष्ट्रहित’ का नाम लेकर यदि भारत जोड़ो यात्रा की सफलता में घबरा कर उसे दिल्ली में रोका जाता है तो इसे ‘जनहित ‘ नहीं बल्कि ‘पार्टी हित’ या फिर बौखलाहट भरा कदम ही कहा जाएगा। उम्मीद है कि केंद्र सरकार कोविड नाम पर राजनीतिक दलों की गतिविधियों, सार्वजनिक गतिविधियों तथा यात्रा में चल रहे लोगों के मौलिक अधिकारों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पाबंदी नहीं लगाएगी। क्या ही अच्छा होता यदि भारत जोड़ो यात्रा के दिल्ली में प्रवेश के समय सरकार संसद चलते रहने देती लेकिन नहीं संसद भी 23 दिसंबर को अनिश्चितकाल के लिए केवल इसलिए स्थगित की जा रही है ताकि भारत जोड़ो यात्रा की गरमा गरम चर्चा संसद में न हो।

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