
Mumbai: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में इस साल कमजोर मानसून और लंबे समय तक बारिश में आए अंतराल ने सूखे का संकट गहरा दिया है। बारिश की कमी का सीधा असर खरीफ फसलों, पशुओं और ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता पर दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने स्थिति का आकलन करने के बाद राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें मराठवाड़ा के 74 तालुके शामिल हैं।
मराठवाड़ा में बारिश की भारी कमी
मराठवाड़ा इस साल बारिश की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, क्षेत्र में सामान्य से करीब 32 से 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। करीब 679.5 मिमी सामान्य बारिश के मुकाबले मराठवाड़ा में लगभग 442 से 447 मिमी बारिश हुई है। लातूर में स्थिति और गंभीर बताई जा रही है, जहां सामान्य के मुकाबले करीब आधी बारिश ही दर्ज हुई।
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धाराशिव और बीड जैसे इलाकों में जुलाई के बाद बारिश में लंबा अंतराल रहने से खेती और ग्रामीण जीवन पर असर पड़ा है। खेतों में नमी की कमी, पानी की उपलब्धता और पशुओं के लिए चारे की समस्या ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
राज्य के 74 फीसदी तालुके सूखे की चपेट में
महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर को सूखे को लेकर सरकारी आदेश जारी किया। इसके तहत 358 में से 265 तालुकों में सूखे की स्थिति घोषित की गई है। यह राज्य के करीब 74 प्रतिशत तालुकों के बराबर है। इन इलाकों में सूखा प्रबंधन संहिता के ‘ट्रिगर-1’ मानदंड पूरे होने के बाद यह फैसला लिया गया।
सरकारी फैसले के बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपाय लागू किए जाएंगे। इनमें भूमि राजस्व में राहत, कृषि ऋण के पुनर्गठन, बिजली शुल्क में रियायत, रोजगार से जुड़े उपाय, पेयजल उपलब्धता, खाद्यान्न और पशुओं के लिए चारे जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
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खरीफ फसलों पर पड़ा असर
बारिश की कमी का सबसे बड़ा असर किसानों की खरीफ फसलों पर पड़ा है। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सोयाबीन, कपास, मक्का, बाजरा और विभिन्न दलहनी फसलों की पैदावार प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। लगातार सूखे दौर के कारण फसलों में नमी की कमी के साथ कीट और बीमारियों का खतरा भी बढ़ा है।
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन कराने के लिए पंचनामा प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। फसल नुकसान के आधार पर आगे मुआवजे से जुड़ा फैसला किया जाएगा। यानी फिलहाल सूखा राहत उपायों की घोषणा हुई है, जबकि सीधे फसल नुकसान के मुआवजे का निर्धारण आकलन के बाद किया जाना है।
किसानों की बढ़ी चिंता
कम बारिश के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। प्रभावित इलाकों में पानी और चारे की उपलब्धता भी चुनौती बनती जा रही है। सरकार की ओर से राहत उपायों के साथ फसल नुकसान का जमीनी आकलन किया जा रहा है, ताकि प्रभावित किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आगे की सहायता तय की जा सके।’
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