
Jail: गोरखपुर जेल के निलंबित जेलर ने किया उत्पीड़न का खुलासा
डिप्टी जेलर की अभद्रता से अवसाद में आए बंदी ने की थी खुदकुशी
प्रदेश की जेलों में बंदी जेल प्रशासन के अधिकारियों के उत्पीड़न और वसूली से अजिज आकर आत्महत्या करने को विवश हो रहे है। इस सच का खुलासा गोरखपुर जेल के निलंबित जेलर ने किया है। इस खुलासे से कारागार विभाग के अधिकारियों में खलबली मची हुई है। उधर विभाग के आला अफसर इस मसले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
गोरखपुर जेल में फरारी की घटना के बाद निलंबित हुए जेलर ने शिकायत में कहा है कि जेल में बंद शौकत अफरोज उर्फ राजू ने बीती 17 जुलाई को जेल के अंदर ही फांसी लाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और बंदी की मौत से पहले की गतिविधियों को लेकर तमाम सवाल उठे थे। निलंबित जेलर ने शिकायत में दावा किया है कि खुदकुशी से कुछ समय पहले बंदी शौकत अफरोज को डिप्टी जेलर ने सर्किल दफ्तर में बुलाकर टार्चर किया था। उसके साथ गाली गलौज के साथ ही अपशब्दों का भी खूब इस्तेमाल किया था। निलंबित जेलर ने जांच में इन तथ्यों को छिपाए जाने का भी आरोप लगाया है।
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निलंबित जेलर ने मांग की है कि बंदी की खुदकुशी से पहले डिप्टी जेलर के साथ हुई उसकी मुलाकात और वहां हुए व्यवहार की भी जांच की जाए। इसके लिए जेल में तैनात अधिकारियों के साथ ही साथ उन बंदियों से भी पूछताछ की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि जांच के बाद या उससे पहले की गतिविधियों की जानकारी हो सकती है। जेलर ने यह भी सवाल उठाया है कि जांच के दौरान कौन कौन अधिकारी मौकेबोर मौजूद थे इसकी भी पड़ताल होनी चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि निलंबित जेलर के इस खुलासे ने जेल अधिकारियों के जेल के अंदर बंदियों का उत्पीड़न और अवैध वसूली के साथ अभद्रता, अपशब्दों का इस्तेमाल करने की वजह से बंदी अवसाद में आकर आत्महत्या करने को विवश हो रहे है।
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जेलों में थम नहीं रही आत्महत्या की घटनाएं
प्रदेश की जेलों में आत्महत्या की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बीते दिनों सीतापुर जेल में एक विचाराधीन बंदी ने फांसी लगाकर जान दे दी। इसी प्रकार सुल्तानपुर, शाहजहांपुर, मुजफ्फरनगर, झांसी, प्रतापगढ़, बस्ती, बरेली, केंद्रीय कारागार फतेहगढ़, अलीगढ़, जौनपुर, आजमगढ़ जेल समेत कई अन्य जेलों में दर्जनों की संख्या में फांसी लगाकर जान दे चुके हैं।
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