
नेपाल में अग्निवीर भर्ती पर बवाल, गोरखा पूर्व सैनिकों ने उठाई बहाली की मांग
बालेन शाह सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
Kathmandu: भारत-नेपाल के ऐतिहासिक सैन्य संबंधों में गोरखा भर्ती का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा के बीच पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने नेपाली युवाओं के लिए भारतीय सेना में भर्ती का रास्ता खोलने की मांग तेज कर दी है। पोखरा में पूर्व सैनिकों ने प्रदर्शन कर सरकार से अग्निपथ योजना के तहत नेपाली युवाओं की भर्ती फिर शुरू कराने की मांग की है।
जनरल धीरज सेठ 17 से 19 अगस्त तक नेपाल के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने नेपाली नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की तथा पोखरा में भारतीय पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों से भी संवाद किया। उनकी यात्रा ऐसे समय हुई, जब गोरखा भर्ती का वर्षों पुराना गतिरोध एक बार फिर नेपाल में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
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पूर्व सैनिकों ने खोला मोर्चा
पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों और समर्थकों ने प्रदर्शन करते हुए नेपाल सरकार से नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में अग्निवीर के तौर पर भर्ती होने की अनुमति देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि भारतीय सेना में सेवा करना नेपाली युवाओं के लिए सम्मानजनक और बेहतर अवसर है। गोरखा पूर्व सैनिकों का दबाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारतीय सेना में नेपाली नागरिकों की पारंपरिक भर्ती लंबे समय से भारत-नेपाल के सैन्य और जन-स्तरीय संबंधों की अहम कड़ी रही है।
2020 से अटका है भर्ती का सिलसिला
नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती 2020 के बाद से ठप है। इसके बाद भारत में अग्निपथ योजना लागू हुई, जिसके तहत सैनिकों की चार वर्ष की अवधि के लिए भर्ती की जाती है और सीमित संख्या में जवानों को आगे नियमित सेवा का अवसर मिलता है। इसी नई व्यवस्था को लेकर नेपाल में सवाल और आपत्तियां उठती रही हैं। अब पूर्व सैनिकों की मांग है कि पुराने गतिरोध को समाप्त कर नेपाली युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाए।

बालेन शाह सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
भारतीय सेना प्रमुख की नेपाल यात्रा के दौरान यह मुद्दा इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि पूर्व गोरखा सैनिक सीधे नेपाल सरकार पर निर्णय लेने का दबाव बना रहे हैं। प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह के नेतृत्व वाली सरकार के सामने अब एक ओर भारत के साथ पारंपरिक सैन्य संबंध हैं, तो दूसरी ओर अग्निपथ योजना को लेकर नेपाल में उठती आपत्तियां हैं।
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हालांकि, जनरल धीरज सेठ की नेपाल के शीर्ष नेतृत्व के साथ आधिकारिक बैठकों में अग्निपथ भर्ती का मुद्दा औपचारिक एजेंडे में प्रमुखता से सामने नहीं आया। इसके बावजूद पोखरा में पूर्व सैनिकों की सक्रियता ने इस विषय को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
दो सौ साल से ज्यादा पुराना है रिश्ता
गोरखा सैनिकों और भारतीय सेना का संबंध दो सदियों से अधिक पुराना माना जाता है। भारतीय सेना में गोरखा रेजीमेंट की परंपरा भारत-नेपाल के बीच सैन्य संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। यही वजह है कि भर्ती पर लंबे समय से लगा ब्रेक केवल रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि दोनों देशों के ऐतिहासिक सैन्य संबंधों से भी जुड़ा विषय माना जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बालेन शाह सरकार गोरखा पूर्व सैनिकों के बढ़ते दबाव के बीच अग्निपथ योजना के तहत नेपाली युवाओं की भर्ती को लेकर कोई ठोस फैसला लेगी, या भारत-नेपाल के बीच यह गतिरोध आगे भी जारी रहेगा। गोरखा भर्ती का सवाल अब सिर्फ सेना में नौकरी का मुद्दा नहीं रहा-यह भारत-नेपाल के पुराने सैन्य रिश्ते और दोनों देशों के बीच भरोसे की एक अहम परीक्षा बन चुका है।
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2 thoughts on ““खाड़ी की गुलामी से बेहतर अग्निवीर”, नेपाल में गोरखा सैनिकों का हल्लाबोल, दबाव में बालेन शाह”
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