
गोरखपुर जेल से फरारी का मामला
ढाई घंटे तक जेल प्रशासन को नहीं लगी कैदी के फरार होने की भनक
Lucknow : गोरखपुर जेल से बंदी की फरारी के मामले में अधीक्षक और जेलर आमने सामने आ गए हैं। करीब 20 दिन पहले फरार हुए बंदी का अभी तक कोई सुराग भी लग पाया है। घटना के बाद निलंबन से आहत जेलर ने जिला प्रशासन को भेजे गए पत्र में कई गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की विस्तृत जांच कराए जाने की मांग की है। जेलर की शिकायत से जेल प्रशासन के अधिकारियों ने हड़कंप मचा हुआ है। उधर विभाग के उच्चाधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
बीती 31 जुलाई को गोरखपुर जेल से विचाराधीन बंदी विपिन जेल की चहारदीवारी फांद कर फरार हो गया। इस मामले में जेलर अरुण कुमार समेत कई सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। निलंबन से आहत जेलर अरुण कुमार ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर फरारी की जांच पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि जिस पीपल के पेड़ की डाल से बंदी के भागने की रिपोर्ट दर्ज की गई है वहां से बिना रस्सी, चादर, कंबल या किसी के सहारे के बिना निकल पाना संभव नहीं है।
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इसके साथ ही जेलर ने सवाल उठाया है कि यदि बंदी सुबह 11 बजे फरार हुआ तो अलार्म करीब ढाई घंटे बाद क्यों कराया गया। उन्होंने जेल के सीसीटीवी फुटेज, रजिस्टर, निर्माण स्थल और पूरे परिसर की गहन जांच कराए जाने की मांग की है। निलंबित जेलर का सवाल है कि पर्याप्त जांच की बिना फरारी का समय और स्थान कैसे तय कर दिया गया। उनका कहना है कि उस दिन सर्च टीम में वह बतौर जेलर के रूप में मौजूद थे। बंदियों और सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ के बावजूद फरारी का समय और स्थान स्पष्ट नहीं हो पाया था। निलंबित जेलर ने जेल के संदिग्ध प्रवृति वाले स्टाफ की भी जांच कराने की मांग की है। निलंबित जेलर ने जांच रिपोर्ट में बताए गए फरारी स्थल का मौका मुआयना कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जिस पेड़ की डाल से बंदी के फरार होने की बात कही गई है वहां से बिना किसी सहायक के निकल पाना संभव नहीं दिखता। इसलिए यह पता लगाना जरूरी है कि बंदी वास्तव में इसी रास्ते से निकला या फिर कोई दूसरी कहानी है। उधर इस संबंध में जब एआईजी कारागार प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।
अयोध्या जेल से फरार कैदियों का नहीं मिला कोई सुराग!
बेटे जनवरी माह में अयोध्या जेल से सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर फरार हुए दो कैदी आज भी पुलिस की पकड़ से दूर है। 22 जनवरी को फरारी की घटना कई दिनों तक सुर्खियों में भी बनी रही। इस मामले में हरकत में आए शासन और मुख्यालय ने जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर समेत कई सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर दिया था। घटना को हुए करीब छह माह का समय बीत चुका है इसके बाद भी फरार कैदियों का कोई सुराग नहीं लगा है।
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