
IAS Ujjwal Priyank Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में गिना जाता है। हर साल लाखों युवा IAS और दूसरी प्रतिष्ठित सेवाओं में जाने का सपना देखते हैं, लेकिन सफलता कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों को ही मिलती है। बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले उज्जवल प्रियांक की कहानी भी ऐसी ही मेहनत, धैर्य और परिवार के विश्वास की कहानी है। UPSC CSE 2025 में उन्होंने अखिल भारतीय रैंकिंग 10 (AIR 10) हासिल कर अपनी कड़ी मेहनत को मुकाम तक पहुंचाया।
पटना से शुरू हुआ पढ़ाई का सफर
उज्जवल प्रियांक ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पटना में की। उन्होंने ज्ञान निकेतन स्कूल से वर्ष 2016 में 10वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद संत माइकल स्कूल, पटना से 2018 में 12वीं की परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए।
स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने जयपुर की JECRC यूनिवर्सिटी से बीटेक किया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें ISRO में करीब छह महीने इंटर्नशिप करने का अवसर भी मिला। तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के विकल्प होने के बावजूद उज्जवल ने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।
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दिल्ली नहीं, पटना में रहकर की तैयारी
UPSC की तैयारी के लिए ज्यादातर अभ्यर्थी दिल्ली जैसे बड़े शिक्षा केंद्रों का रुख करते हैं। हालांकि, उज्जवल ने इसके बजाय पटना में रहकर अपनी तैयारी जारी रखने का फैसला किया। उन्होंने ऑनलाइन माध्यमों, किताबों और टेस्ट सीरीज का सहारा लिया। पढ़ाई के दौरान उन्होंने सीमित और भरोसेमंद स्टडी मैटेरियल पर ध्यान दिया। उनका जोर ज्यादा से ज्यादा सामग्री जुटाने के बजाय बार-बार रिविजन करने और अपनी गलतियों को सुधारने पर रहा। यह रणनीति उनके लिए काफी उपयोगी साबित हुई। उन्होंने अपनी तैयारी को व्यवस्थित रखा और लगातार खुद का मूल्यांकन करते रहे।
असफलताओं ने सिखाया आगे बढ़ना
UPSC का सफर उज्जवल के लिए पहली कोशिश में आसान नहीं रहा। एक प्रयास में वे इंटरव्यू चरण तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना सके। इसके बाद एक अन्य प्रयास में उन्हें प्रीलिम्स में ही सफलता नहीं मिली। लगातार मिली इन चुनौतियों से उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ। इसी दौर में उनकी मां के एक सवाल ने उन्हें अंदर तक प्रभावित किया। मां ने पूछा, “तुम रो क्यों नहीं रहे?”
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यह सवाल उनके लिए केवल भावनात्मक पल नहीं था, बल्कि खुद को संभालकर दोबारा प्रयास करने की प्रेरणा भी बना। मां के विश्वास ने उज्जवल को अपनी कमियों पर काम करने और पहले से ज्यादा तैयारी के साथ लौटने का हौसला दिया।
तीसरे प्रयास में हासिल की AIR 10
असफलताओं से सीख लेकर उज्जवल ने अपनी तैयारी को और बेहतर किया। उन्होंने रणनीति में जरूरी बदलाव किए और लगातार अभ्यास पर ध्यान दिया। आखिरकार UPSC CSE 2025 के परिणाम ने उनकी मेहनत को पहचान दी।
उज्जवल प्रियांक ने ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल की। इस उपलब्धि के साथ उनका IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा हुआ। उनकी सफलता ने यह भी दिखाया कि सीमित संसाधनों के बीच सही रणनीति, अनुशासन और निरंतर मेहनत के दम पर बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया जा सकता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी
उज्जवल की सफलता सिर्फ एक परीक्षा में मिली रैंक नहीं है। यह उन छात्रों के लिए प्रेरणा है जो असफलता के बाद खुद को कमजोर समझने लगते हैं। उनकी कहानी बताती है कि एक असफल प्रयास मंजिल का अंत नहीं होता। पटना में रहकर सेल्फ-स्टडी के जरिए UPSC की तैयारी करना, शुरुआती असफलताओं से सीखना और फिर देशभर में AIR 10 हासिल करना उज्जवल प्रियांक के संघर्ष को खास बनाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरे सफर में उनकी मां का विश्वास उनके लिए मजबूत सहारा बना।
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