
Sujit Sinha Encounter : झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद मामला लगातार चर्चा में है। पुलिस के मुताबिक, जेल से दूसरी जेल ले जाते समय रास्ते में सुरक्षा वाहन का टायर पंचर हुआ। इसी दौरान सुजीत ने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू की। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए और अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की पड़ताल शुरू कर दी। वहीं, सुजीत के परिवार ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाते हुए इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताया है। परिवार की ओर से स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई गई है।
टायर पंचर होने के बाद क्या हुआ?
बताया गया कि 2 अगस्त की रात सुजीत सिन्हा को साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल ले जाया जा रहा था। सुपायडीह और केंदबोना के बीच सुरक्षा काफिले की एक गाड़ी का टायर पंचर हो गया। इसके बाद कैदी को दूसरे वाहन में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
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पुलिस का दावा है कि इसी दौरान सुजीत ने एक जवान का हथियार छीन लिया और अंधेरे का फायदा उठाकर भागने लगा। पुलिस के अनुसार, उसने टीम पर गोली भी चलाई, जिसके बाद जवाबी फायरिंग की गई। गंभीर रूप से घायल सुजीत को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
अपराध की दुनिया में बड़ा नाम था सुजीत
सुजीत सिन्हा पलामू का रहने वाला था और झारखंड के संगठित अपराध नेटवर्क में उसका नाम लंबे समय से सामने आता रहा था। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर मामलों में केस दर्ज बताए जाते हैं।
पुलिस के मुताबिक, उसने धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, पलामू और आसपास के इलाकों में अपना नेटवर्क बनाया था। कोयला कारोबारियों, ठेकेदारों और अन्य व्यवसायियों से कथित लेवी वसूली के मामले में भी उसका नाम सामने आया था।
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परिवार ने उठाए गंभीर सवाल
एनकाउंटर के बाद सुजीत के परिवार ने पुलिस के दावे को स्वीकार नहीं किया। परिवार का आरोप है कि यह सुनियोजित हत्या हो सकती है। परिजनों ने दावा किया कि सुजीत को पहले से अपनी जान का खतरा था और इस संबंध में कानूनी स्तर पर भी चिंता जताई गई थी।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से पोस्टमार्टम, घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच और मजिस्ट्रेट जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।
क्यों याद आया विकास दुबे एनकाउंटर?
सुजीत सिन्हा का मामला वर्ष 2020 में कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर की याद इसलिए दिला रहा है क्योंकि दोनों घटनाओं में पुलिस वाहन से जुड़ा घटनाक्रम अहम रहा।
विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर लाते समय पुलिस वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। पुलिस ने तब दावा किया था कि उसने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और मुठभेड़ में मारा गया। सुजीत के मामले में भी पुलिस वाहन से जुड़ी घटना के बाद हथियार छीनने, भागने और फायरिंग की बात सामने आई है। दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन समानताओं के चलते एक बार फिर पुलिस एनकाउंटर की प्रक्रिया और उसकी जांच को लेकर बहस तेज हो गई है।
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