यूएन में भारत का सुझावः सूडान की शिक्षा के लिए अपनाएं ‘दीक्षा’ मॉडल

education crisis in sudan

शाश्वत तिवारी

education crisis in sudan : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक उच्च स्तरीय ‘एरिया फ़ॉर्मूला बैठक’ में भारत ने सूडान में शिक्षा के संकट को लेकर बेहद मजबूत और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। ‘सूडान में शिक्षा की सुरक्षा: शांति, रिकवरी और स्थिरता में निवेश’ विषय पर आयोजित इस विशेष बैठक में भारतीय काउंसलर एल्डोस मैथ्यू पुन्नूस ने भारत की ओर से आधिकारिक वक्तव्य दिया। बैठक में भारत ने स्कूलों पर हो रहे हमलों के खिलाफ सख्त वैश्विक कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग की और भारतीय ‘दीक्षा’ मॉडल अपनाने पर जोर दिया।

न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बताया कि काउंसलर पुन्नूस ने इस बैठक में नागरिकों, खासकर बच्चों और शिक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की और जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सूडान में बच्चों के लिए शिक्षा बहाल करने के लिए विस्थापन, सुरक्षा और भोजन व दवाओं तक पहुंच ज़रूरी शर्तें हैं।

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भारतीय मिशन ने कहा पुन्नूस ने सूडान में 600 लाभार्थियों के लिए भारत के कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक लिम्ब) कैंप के बारे में बताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहां भौतिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है, वहां डीपीआई शिक्षा से जुड़ी कमियों को दूर कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने दीक्षा – नॉलेज शेयरिंग के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर – के साथ भारत के अनुभव के बारे में भी बताया।

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काउंसलर पुन्नूस ने यूएन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सूडान में पिछले तीन वर्षों के संघर्ष के कारण 1.7 करोड़ से अधिक बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है और स्कूलों पर हमलों में 57 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि बिना जवाबदेही के सुरक्षा निष्प्रभावी है और जो लोग शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए।

भारत ने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में युद्ध के कारण भौतिक स्कूल नष्ट हो चुके हैं, वहां शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने के लिए डिजिटल तकनीकों का सहारा लिया जाए। भारत ने अपने सफल ‘दीक्षा’ (डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग) प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे डिजिटल माध्यमों से सूडान के बच्चों तक पढ़ाई पहुंचाई जा सकती है।

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