
Trump-Iran News : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर चुका था, लेकिन अंतिम समय में ईरान ने बातचीत की इच्छा जताते हुए संपर्क किया। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर पश्चिम एशिया की राजनीति और अमेरिका-ईरान संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
लास वेगास में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य दबाव इतना अधिक था कि ईरान को आखिरकार बातचीत की मेज पर लौटना पड़ा। उनके अनुसार, संभावित बड़े सैन्य हमले से ठीक पहले ईरानी अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की ओर से कहा गया, “कृपया हमला मत कीजिए, आइए बातचीत करते हैं।”
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हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका कूटनीतिक समाधान का समर्थक है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। ट्रंप ने कहा कि वह युद्ध की बजाय बातचीत को बेहतर विकल्प मानते हैं, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी रुख पहले की तरह सख्त रहेगा।
इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर भी सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि इस मुद्दे पर वार्ता में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और निकट भविष्य में किसी समझौते की घोषणा संभव है। दूसरी ओर, ईरान ने भी वार्ता की प्रक्रिया जारी रहने की पुष्टि की है।
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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ओमान की मध्यस्थता में चल रही बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, समझौते का मसौदा तैयार किया जा चुका है और अब उसे ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की मंजूरी का इंतजार है। माना जा रहा है कि यह एक अस्थायी व्यवस्था होगी, जिसका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता को फिर से शुरू करना है।
हालांकि दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद अभी भी कायम हैं। अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रांजिट शुल्क वसूलने या रणनीतिक नियंत्रण का अधिकार मिले, जबकि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपनी भूमिका और प्रभाव बनाए रखना चाहता है। यही कारण है कि वार्ता के बावजूद कई संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का निर्यात इसी समुद्री मार्ग से होता है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है।
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