
India-US Defense Partnership : भारत और अमेरिका के रणनीतिक रिश्ते लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। रक्षा सहयोग से लेकर परमाणु ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों तक दोनों देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। अमेरिकी विदेश विभाग के असिस्टेंट सेक्रेटरी एस. पॉल कपूर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन भारत के साथ अपने संबंधों को व्यापक और दीर्घकालिक आधार पर आगे बढ़ा रहा है, जिससे न केवल दोनों देशों की आर्थिक और सामरिक ताकत बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन भी अधिक मजबूत होगी।
हूवर इंस्टीट्यूशन में भारत पर आयोजित एक सम्मेलन के दौरान एस. पॉल कपूर ने कहा कि भारत के साथ बढ़ता सहयोग अमेरिका में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देश रक्षा क्षेत्र के अलावा सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती तकनीकों में भी साझेदारी को नई दिशा दे रहे हैं। उनका मानना है कि यह सहयोग भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में दोनों देशों के लिए बेहद अहम साबित होगा।
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रक्षा साझेदारी होगी और मजबूत
भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है। दोनों देशों ने थल, जल, वायु, अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौते किए हैं। पिछले वर्ष दोनों देशों ने रक्षा इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त सैन्य सहयोग को मजबूत करने के लिए एक नए फ्रेमवर्क पर भी हस्ताक्षर किए थे।
भारत ने पिछले दो दशकों में अमेरिका से कई आधुनिक रक्षा उपकरण खरीदे हैं। इनमें अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर, C-17 और C-130J ट्रांसपोर्ट विमान, P-8I मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट और M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर जैसी अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियां शामिल हैं। इससे दोनों देशों के रक्षा संबंध पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुए हैं।

परमाणु ऊर्जा और AI पर बढ़ेगा सहयोग
एस. पॉल कपूर ने कहा कि भारत और अमेरिका सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में भी सहयोग का दायरा बढ़ा रहे हैं। इसी क्रम में अमेरिकी न्यूक्लियर कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल इस वर्ष भारत आया था, जिसने निवेश की संभावनाओं का आकलन किया। भारत सरकार द्वारा ‘शांति एक्ट (SHANTI Act)’ के तहत न्यूक्लियर लायबिलिटी फ्रेमवर्क में किए गए बदलावों से निजी कंपनियों की भागीदारी आसान होने की उम्मीद है। इससे भारत के सिविल न्यूक्लियर कार्यक्रम को नई गति मिलने की संभावना है।
तकनीक और अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
AI, उभरती डिजिटल तकनीकों और सुरक्षित सप्लाई चेन पर दोनों देशों का सहयोग आर्थिक विकास के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती देगा।
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