
The Kari custom in Pakistan : पाकिस्तान के सिंध प्रांत से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने एक बार फिर तथाकथित ‘ऑनर किलिंग’ की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है। कराची के बाहरी इलाके में एक सीमेंट फैक्ट्री में रात की शिफ्ट में काम कर रहे मोहम्मद रमजान को अचानक घर से फोन आया। उन्हें बताया गया कि उनकी 20 वर्षीय बेटी खालिदा चंदियो की उनके पैतृक गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई है।
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, यह खबर सुनकर रमजान और उनकी पत्नी नाबुल पूरी तरह टूट गए। घर लौटने पर उन्हें पता चला कि खालिदा को रात के अंधेरे में घर से बाहर ले जाया गया और कुछ सौ मीटर दूर गोली मार दी गई। इतना ही नहीं, हत्या का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी साझा कर दिया गया, जिसे लाखों लोगों के साथ उसके माता-पिता ने भी देखा।
क्या होता है ‘कारी’ घोषित करना?
पुलिस के मुताबिक, खालिदा की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उसे ‘कारी’ घोषित कर दिया गया था। ‘कारी’ सिंधी भाषा का शब्द है, जिसका इस्तेमाल किसी महिला पर अवैध संबंध रखने का आरोप लगाने के लिए किया जाता है। इसके बाद कथित तौर पर परिवार या समुदाय की ‘इज्जत’ बचाने के नाम पर उसकी हत्या कर दी जाती है। खालिदा की मां नाबुल कहती हैं, “मेरी बेटी की चीखें आज भी मेरे कानों में गूंजती हैं। हम उसे बचा नहीं सके।”
ये भी पढ़ें
परिवार के ही लोगों पर हत्या का आरोप
पुलिस का आरोप है कि खालिदा के दादा और उसके मामा ने स्थानीय कबीलाई बुजुर्ग (जिरगा) के आदेश पर उसे गोली मार दी। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक अन्य की तलाश जारी है। खालिदा के पिता मोहम्मद रमजान का कहना है, “अगर उन्हें लगता था कि मेरी बेटी ने कोई गलती की है, तो उसे पुलिस के हवाले कर देते। कम से कम वह जिंदा तो होती।”
पति के लापता होने के बाद शुरू हुआ विवाद
करीब पांच साल पहले खालिदा की शादी उसके ममेरे भाई से हुई थी। पिछले साल उसका पति, जो कराची की एक फैक्ट्री में काम करता था, अचानक लापता हो गया। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद खालिदा अपने माता-पिता के घर लौट आई। पुलिस के अनुसार, 10 अप्रैल की रात गांव के कुछ लोगों और रिश्तेदारों ने उस पर किसी अन्य पुरुष से संबंध होने का आरोप लगाया। मामला स्थानीय जिरगा के सामने रखा गया, जहां बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या सबूत के उसे ‘कारी’ घोषित कर दिया गया। इसके बाद कथित तौर पर तीन लोगों ने उसे घर से घसीटकर बाहर निकाला और गोली मार दी।
प्रतिबंध के बावजूद सक्रिय हैं जिरगा
पाकिस्तान की अदालतें जिरगा जैसी अनौपचारिक कबीलाई पंचायतों को आपराधिक मामलों की सुनवाई से प्रतिबंधित कर चुकी हैं। इसके बावजूद मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सिंध के ग्रामीण इलाकों में आज भी ऐसे जिरगे महिलाओं से जुड़े मामलों में फैसले सुनाते हैं, जिनका कई बार दुखद अंत हत्या के रूप में होता है।
ये भी पढ़ें
हर साल सैकड़ों महिलाओं की जाती है जान
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) और महिला अधिकार संगठन सिंध सुहाई साथ के अनुसार, इस वर्ष 1 जनवरी से 20 जून के बीच केवल सिंध प्रांत में सामाजिक बदनामी या तथाकथित सम्मान के नाम पर 112 महिलाओं की हत्या की गई।
मानवाधिकार आयोग के मुताबिक, वर्ष 2025 में पूरे पाकिस्तान में कम से कम 470 ऑनर किलिंग के मामले दर्ज किए गए, जिनमें 126 मामले केवल सिंध से थे। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि दूरदराज के इलाकों में कई मामलों को आत्महत्या या दुर्घटना बताकर दर्ज कर दिया जाता है।
‘कारी’ का आरोप बन जाता है हथियार
सिंध सुहाई साथ का कहना है कि कई मामलों में ‘कारी’ का आरोप केवल महिलाओं को निशाना बनाने के लिए लगाया जाता है। भूमि विवाद, विरासत या कबीलाई दुश्मनी जैसे मामलों में भी इस आरोप का इस्तेमाल महिला की हत्या को उचित ठहराने और उसकी संपत्ति पर कब्जा करने के लिए किया जाता है।
मौत के बाद भी नहीं मिलता सम्मान
खालिदा को उसके गांव में दफनाया गया, लेकिन परिवार के कब्रिस्तान से अलग। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, ‘कारी’ घोषित महिलाओं को सामान्य कब्रिस्तान में दफनाने की अनुमति नहीं दी जाती। कई बार उनके अंतिम संस्कार रात के अंधेरे में किए जाते हैं और कब्रों पर कोई निशान भी नहीं छोड़ा जाता।]
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews
रिमांड पर हैं प्रबल प्रताप सिंह
चिनहट: नहाने गए तेज बहाव में बह गया मासूम, दूसरे दिन भी नहीं मिला
मोहनलालगंज में नाबालिग बच्ची से दरिंदगी, पुलिस ने पीड़िता के दर्ज किए बयान


One thought on “पाकिस्तान की खौफनाक परंपरा: पहले ‘कारी’ घोषित करते हैं, फिर छीन लेते हैं महिलाओं की जिंदगी”
Comments are closed.