
त्रिपुरा DGP की मौत से उठे कई सवाल
DGP Death Mystery : त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनखड़ की मौत का मामला अब भी रहस्य बना हुआ है। राज्य के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी का शव पुलिस मुख्यालय स्थित उनके कार्यालय में मिलने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, लेकिन परिवार की ओर से उठाए गए सवालों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। परिवार का कहना है कि अनुराग धनखड़ जैसे मजबूत इच्छाशक्ति वाले अधिकारी आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकते थे। उन्होंने मांग की है कि उनकी मौत की हर पहलू से जांच की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
परिवार ने उठाई जांच की मांग
अनुराग धनखड़ का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव उत्तर प्रदेश के बागपत में राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान त्रिपुरा पुलिस और यूपी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। DGP के भाई ने कहा कि जिस परिस्थिति में उनके भाई की मौत हुई है, उसकी गहन जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि अनुराग धनखड़ ने अपने लंबे करियर के दौरान कई बड़े मामलों की जांच की थी, इसलिए अन्य संभावित पहलुओं को भी ध्यान में रखकर जांच होनी चाहिए।
दफ्तर में बंद कमरे से मिला शव
घटना उस समय सामने आई जब 20 जुलाई की सुबह अनुराग धनखड़ त्रिपुरा पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे। रोज की तरह वह अपने कार्यालय गए, लेकिन उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि उन्हें कुछ समय तक परेशान न किया जाए क्योंकि वह जरूरी काम में व्यस्त हैं। करीब डेढ़ घंटे तक जब उन्होंने किसी कॉल का जवाब नहीं दिया और न ही किसी अधिकारी से मुलाकात की, तो सुरक्षा कर्मियों को शक हुआ। इसके बाद जब उनके कमरे का दरवाजा खटखटाया गया और अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। काफी कोशिशों के बाद जब दरवाजा नहीं खुला तो उसे तोड़ा गया। कमरे के अंदर पहुंचने पर अधिकारियों को DGP का शव वॉशरूम में मिला। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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सुसाइड नोट नहीं मिलने से बढ़ा रहस्य
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह आत्महत्या है तो इसकी वजह क्या थी। अभी तक पुलिस को कोई सुसाइड नोट मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच एजेंसियां उनकी निजी जिंदगी, पेशेवर परिस्थितियों और अन्य संभावित कारणों की जांच कर रही हैं। पुलिस ने घटनास्थल से फॉरेंसिक सैंपल जुटाए हैं। इसके अलावा DGP के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है, ताकि मौत के कारणों का पता लगाया जा सके।
तीन दशक का शानदार करियर
अनुराग धनखड़ 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। पिछले साल उन्हें त्रिपुरा का DGP बनाया गया था। इससे पहले उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं। वह CBI में भी काम कर चुके थे और कई बड़े मामलों की जांच से जुड़े रहे थे। इसके अलावा उन्होंने बीएसएफ, सीआईएसएफ और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भी सेवाएं दी थीं। उनकी छवि एक ईमानदार और काबिल पुलिस अधिकारी की रही है। यही वजह है कि उनकी अचानक हुई मौत ने पुलिस विभाग और आम लोगों को हैरान कर दिया है।
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
फिलहाल त्रिपुरा पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। परिवार द्वारा उठाए गए सवालों और सामने आ रही परिस्थितियों को देखते हुए इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
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