अध्यक्ष ही बनाये गये जिला पंचायत प्रशासक

UP Panchayat News

योगी सरकार ने जारी किया आदेश

UP Panchayat News : उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की सभी जिला पंचायतों का कार्यकाल शनिवार (11 जुलाई) को समाप्त होने के मद्देनजर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक नई जिला पंचायतों के गठन और पहली बैठक होने तक अथवा अधिकतम छह माह की अवधि के लिए निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को संबंधित जिला पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया जाएगा।

पंचायती राज अनुभाग-2 की ओर से जारी आदेश में शासन ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा-20 और धारा-21 के तहत जिला पंचायत का कार्यकाल पहली बैठक की तिथि से पांच वर्ष का होता है तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल भी जिला पंचायत के कार्यकाल के साथ समाप्त हो जाता है। वर्तमान जिला पंचायतों का कार्यकाल 11 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है।

वही उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त हो रहा है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने सभी जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया है, ताकि नई व्यवस्था लागू होने तक जिला पंचायतों का कामकाज सुचारु रूप से चलता रहे। मंत्री ने बताया कि इस फैसले का उद्देश्य जिला पंचायतों के प्रशासनिक और विकास कार्यों में किसी भी प्रकार का व्यवधान न आने देना है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था बनने और नए जिला पंचायत अध्यक्षों के पदभार ग्रहण करने तक वर्तमान अध्यक्ष प्रशासक के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।

पहले DM संभालते थे जिम्मेदारी

अब तक जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद संबंधित जिले के जिलाधिकारी (DM)  को प्रशासक नियुक्त किया जाता रहा है। इस दौरान जिला पंचायत का प्रशासनिक और वित्तीय कार्य डीएम की देखरेख में संचालित होता था। हालांकि, इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव किया है। सरकार ने निर्णय लिया है कि कार्यकाल पूरा कर चुके निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। वे नई जिला पंचायतों के गठन और नए अध्यक्षों के पदभार ग्रहण करने तक प्रशासक के रूप में कार्य करते रहेंगे।

अब ब्लॉक प्रमुखों पर सरकार की नजर

जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले के बाद अब सरकार की नजर ब्लॉक प्रमुखों पर है। प्रदेश के सभी ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार 18 जुलाई के आसपास इस संबंध में भी आदेश जारी कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ब्लॉक प्रमुखों को भी प्रशासक नियुक्त करने पर विचार कर रही है, ताकि नई क्षेत्र पंचायतों के गठन और नए ब्लॉक प्रमुखों के चुने जाने तक विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों में किसी तरह का व्यवधान न आए। हालांकि, इस संबंध में अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य जिला पंचायतों के प्रशासनिक और विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखना है, ताकि नई व्यवस्था लागू होने तक किसी भी विकास परियोजना या जनहित से जुड़े कार्य पर असर न पड़े।

ग्राम प्रधानों का मामला हाईकोर्ट में

उत्तर प्रदेश में निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि यह व्यवस्था किस कानूनी प्रावधान के तहत लागू की गई है और यह संविधान के अनुरूप कैसे है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 12(3-A) की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए इस पर विचार करने की आवश्यकता जताई। अदालत ने सुनवाई के दौरान वर्ष 2000 के ‘प्रेम लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें इसी तरह के प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद 243E- और 243-K के विपरीत मानते हुए असंवैधानिक करार दिया गया था। हालांकि, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में दायर अपील का निस्तारण करते हुए कानून से जुड़े प्रश्नों को खुला छोड़ दिया था। अब इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। इस सुनवाई पर सरकार की व्यवस्था की संवैधानिक वैधता को लेकर सभी की नजरें टिकी हैं।


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